गुरु रविदास जयंती

गुरु रविदास जयंती || guru ravidas jayanti Hindi mai || now gyan

guru ravidas jayanti in hindi : गुरु रविदास जयंती माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। क्योंकि इसी दिन रविदास जी का जन्म हुआ था। गुरु रविदास जयंती भारत की प्रमुख जयंती में से एक है। गुरु रविदास जयंती के दिन अमृतवाणी गुरु जी को पढी जाती है। तथा सभी कार्यक्रमों का भव्य आयोजन वाराणसी में होता है। दूर-दूर से श्रद्धालु इस जयंती कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

गुरु रविदास जी का जीवन परिचय :-

गुरु रविदास जी का मूल नाम रविदास जी का बचपन में बहुत से अन्य नामों से भी जाना जाता था जैसे – रैदास रोहिदास आदि उनकी माता का नाम श्रीमती कलसा देवी तथा पिता का नाम श्री संतोख दास जी था।  गुरु रविदास जी का जीवन परिचय निम्नवत  है जिसमें उनके माता-पिता तथा उनके जीवन का विवरण दिया गया है:

1.मूल नामगुरु रविदास
2.अन्य नामरैदास, रोहिदास
3.माता का नामश्री मति कलसा देवी
4.पिता का नामश्री संतोख दस जी
5.जन्म1377 ई.
6.जन्म स्थानवाराणसी, उत्तरप्रदेश
7.दादा का नामश्री कालू राम जी
8.दादी का नामश्री मति लखापति जी
9.पत्नी का नाम श्री मति लोना
10.पुत्र का नाम श्री  विजयदस
गुरु-रविदास-जी-की-जयंती

संत रविदास जी का जन्म हिंदी पंचांग के अनुसार के मध्य पूर्णिमा को बनारस के बसें गोवर्धनपुर गांव में हुआ था बहुत से विद्वानों का यह कथन है कि संत रविदास जी ने मीराबाई राजा पीपा व राजा नागरमल को ज्ञान का मार्ग दिखाया। जिसके कारण पूरे विश्व में अपनी छाप छोड़ी संत रविदास इतने महान थे।कि इनकी ख्याति को देखकर सिकंदर लोधी ने इन्हें आमंत्रण भेज कर बुलाया ।

क्यों है? गुरु रविदास जयंती महत्वपूर्ण :-

 गुरु रविदास जयंती के जन्म को रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है। वे एक आध्यात्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने जातिवाद तथा अध्यात्म के खिलाफ कार्य किया।  गुरु रविदास जयंती के दिन उनके अनुयाई पवित्र नदी में स्नान करके उनके लिए अमृतवाणी का गायन करते हैं। इस सब का भव्य आयोजन वाराणसी उत्तर प्रदेश में होता है।

गुरु रविदास जयंती समय तथा तारीख :-

गुरु रविदास जयंती का कोई एक निश्चित समय नहीं है बल्कि पंचांगो व शास्त्रों के आधार पर इसकी तिथि प्रत्येक वर्ष बदलती रहती है।

S.No.जयंती || jayantiदिन || day
1.गुरु रविदास जयंती 202127 फरवरी 2021
2.गुरु रविदास जयंती 202216 फरवरी 2022
3.गुरु रविदास जयंती 20235 फरवरी 2023
4.गुरु रविदास जयंती 202424 फरवरी 2024
5.गुरु रविदास जयंती 202512  फरवरी 2025
गुरु-रविदासजयंती-कब-है?

गुरु रविदास जी द्वारा कुरीतियों का विरोध :-

गुरु रविदास जी के पिता जूता बनाने का कार्य किया करते थे। अतः यह कार्य पैतृक रूप से गुरु रविदास जी को भी, मिला। इस कार्य को भी उन्होने बड़ी प्रसन्नता के साथ ग्रहण कर लिया था।

गुरु रविदास जी की प्रतिष्ठा :-

भारत की पवित्र भूमि पर अनेक बार साधु-संतों तथा फकीरों ने जन्म लेकर इस भूमि को कृतार्थ किया है। उनमें से प्रमुख हैं, संत रविदास जी जिन्होंने अपने कर्म मन तथा वचनों से समाज में फैली हुई कुरीतियों का अंत किया। जिसके अंतर्गत जातिवाद, छोटे-बड़े भेदभाव जैसी कुरीतियां शामिल थी। कहा जाता है कि संत रविदास जी समाज सुधारक तथा मनुष्य के शरीर में बसे ईश्वर के अवतार थे। रविदास जी बहुत ही दयालु महान संत थे। यह पूरे विश्व में एक महान कवि तथा एक महान संत के रूप में जाने जाते। कबीर दास जी ने इन्हें संत कहकर पुकारा और तब से इनका नाम संत रविदास जी पड़ गया।

गुरु रविदास जी से संबंधित प्रेरक कहानी :-

वैसे तो गुरु रविदास जी जूता बनाने का कार्य किया करते थे । उन्हें इस कार्य को करने में किसी भी प्रकार की कोई शर्म महसूस नहीं होती थी। तो उनके जीवन से संबंधित में प्रेरक कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं जो इस प्रकार है :-

“एक बार की बात है गुरु रविदास जी अपने कार्य में मग्न अर्थात जूता बनाने में व्यस्त थे। तभी किसी ने उन्हें गंगा स्थान पर चलने के लिए कहा है। तो उन्होंने मना कर दिया, और कहा कि मैं कार्य में थोड़ा सा व्यस्त हूं। मुझे यह जूता देना है और अगर मैं आपके साथ चला गया तो इन जूतों को बनाने में देरी हो जाएगी। और यदि मैं आपको वचन दे दूं तो वह भी टूट जाएगा। अतः रविदास जी वचन के पक्के संत थे ।”

गुरु रविदास जयंती 2022 | guru ravidas jayanti Hindi

FAQ SECTION ON THIS TOPIC :-

रविदास जयंती कब मनाई जाती है?

गुरु रविदास जयंती प्रत्येक वर्ष की माघ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। गुरु रविदास जयंती का भव्य आयोजन वाराणसी में होता है।

रविदास जी का जन्म कब हुआ था?

गुरु रविदास का जन्म 1377 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनके जन्मदिवस को गुरु रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता है। 

गुरु रविदास जी किसकी भक्ति करते थे?

गुरु रविदास जी अपने गुरु कबीर की भक्ति करते थे । क्योंकि कबीर व रविदास जी ने समाज में फैली कुरीतियों के उन्मूलन के लिए कार्य किया।

रविदास जी की मृत्यु कैसे हुई?

गुरु रविदास जी के भक्तों के अनुसार उनकी मृत्यु 120 126 वर्ष की उम्र में प्राकृतिक कारणों से हुई।

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