गोस्वामी तुलसीदास जयंती

गोस्वामी तुलसीदास जयंती || Goswami Tulsidas Jayanti in hindi || now gyan

Goswami Tulsidas hindi mai : गोस्वामी तुलसीदास एक महान कवि तथा राम भक्त थे । वे अत्यंत बुद्धिमान व श्री राम में विश्वास रखते थे । इस महान पुरुष की जयंती श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को 27 जुलाई को मनाया जाता है । तुलसीदास जी अपने लोकप्रिय कृति रामचरित्रमानस में श्री राम के रूप में हमें एक ऐसा दर्पण दिया है, जिसे सम्मुख रखकर हम अपने गुणों-अवगुणों का मूल्यांकन कर सकते हैं ।

तुलसीदास जी की रचनाएं || Books by tulsidas ji :-

तुलसीदास जी को आज संपूर्ण विश्व जानता है, उनकी अनेक रचनाएं है। जिनमें से एक रामचरित्रमानस है। इनके अलावा तुलसीदास जी की रचनाएं निम्न वत है :-

1-दोहावली [ Dohavali ]
2- गीतावली [ Geetavali ]
3- विनयपत्रिका [ Vinaya Patrika ]
4- कवित्त रामायण [ Poetry Ramayana ]
5- बरवै रामायण [ Barvai Ramayana ]
6- जानकी मंगल [ Janki Mangal ]
7- रामललानहछू [ Ram Lallanhachhu ]
8-हनुमान बालुक [ Hanuman Baluk ]
9- वैराग्य संदीपनी [ Vairagya Sandipan ]
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तुलसीदास जी का जीवन परिचय || Goswami Tulsidas ka jivan parichiya :-

तुलसीदास जी भगवान श्री राम के परम भक्त थे। कहते हैं, कि तुलसीदास जी का नाम लेते ही भगवान श्री राम का स्वरूप सामने आ जाता है।

जन्म || Birth date and place :

तुलसीदास जी का जन्म 1511 में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रामबोला गांव में हुआ था।

माता पिता || mother-father :

तुलसीदास जी के पिता का नाम – श्री आत्माराम दुबे तथा इनकी माता का नामकुंती देवी था। तुलसीदास एक पंडित परिवार में जन्मे थे। कहा जाता है- कि जन्म के समय तुलसीदास जी रोए नहीं थे। बल्कि उनके मुंह में राम राम का उच्चारण साफ-साफ सुनाई दे रहा था।

बचपन || childhood :

तुलसीदास जी के बचपन का नाम राम बोला था। यह नाम इसलिए रखा गया, क्योंकि तुलसीदास जी ने अपने जन्म के समय राम-राम का उच्चारण किया था। कहा जाता है, कि तुलसीदास जी के जन्म के समय में ही दांत आ गए थे। उनका जन्म असाधारण था। तुलसीदास जी सभी बच्चों के सम्मान 9वें महीने के बजाय 12 महीने में पैदा हुए थे। वह बचपन से ही अद्भुत बुद्धिमान थे।

पत्नी || wife :

गोस्वामी तुलसीदास जी की पत्नी का नाम रत्नावली था। जो कि एक अति सुंदर कन्या थी। विवाह के बाद तुलसीदास गृहस्थ जीवन और पत्नी के प्रेम में ऐसे डूबे कि, उन्हें दुनिया जहान और लोग मर्यादा का ज्ञान नहीं रहा। लेकिन कहा जाता है- कि एक बार उनकी पत्नी रत्नावली ने उनका अपमान कर दिया। जिससे तुलसीदास अत्यंत दुखी हो गए। उसके बाद उन्होंने गृहस्ती छोड़कर प्रभु श्री राम के चरणों में चले गए। इसके बाद ही उन्होंने अनेक रचनाएं की अनेक महत्वपूर्ण कार्य तथा सबसे बड़े राम भक्त कहलाए। तत्पश्चात गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

मृत्यु || death :

तुलसीदास जी एक महान कवि व राम भक्तों से बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किये। उनकी मृत्यु1623 अस्सी घाट, वाराणसी में हुई कहा जाता है। कि उन्होंने राम-राम कह कर ही अपने प्राण छोड़ दिए थे।

तुलसीदास जी के प्रवचन || anmolvachan tulsidas ji ke :

तुलसी जी ने राम भक्तों के साथ साथ समाज में भी अपना योगदान दिया। उन्होंने अनेक प्रवचन दिए। जो कि प्राचीन समय के साथ-साथ अभी भी सार्वत्रिक सत्य बने हुए हैं। उनका एक प्रमुख पर प्रवचन इस प्रकार है:

सहज सुहद गुरु स्वामी सिख जो न करए सिर मनि |

सो पछताएा अघाइ उर अवसि होए हित हानि ||

गोस्वामी तुलसीदास

अर्थ :-

स्वाभाविक हित चाहने वाले गुरु और स्वामी किसी को जो सिर चढ़ाकर नहीं मानता, वह हृदय मैं खूब पछताता है और उसकी हित की हानि अवश्य होती है।

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