महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती

महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती || mahrishi dayanand saraswati jayanti hindi mai || now gyan

Dayanand saraswati jayanti in hindi: महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती हिंदुओं की पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास में मनाई जाती है। दयानंद सरस्वती जी भारत की धरती पर जन्म में अनेक महापुरुषों में से एक थे। जिन्होंने कई समाज सुधारक कार्य की तथा आर्य समाज की स्थापना की।

स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती कब मनाई जाती है? :-

दयानंद सरस्वती जी की जयंती हिंदू पंचांग के हिसाब से फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। जबकि इनका जन्म 12 फरवरी 1824 को हुआ था।

S.No.जयंती || jayantiदिन || date
1.स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 20218 मार्च 2021
2.स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 202226 फरवरी 2022
3.स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 202315 फरवरी 2023
4.स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 20245 मार्च 2024
दयानंद सरस्वती जयंती तारीख

क्यों है? महत्वपूर्ण दयानंद सरस्वती जयंती:-

दयानंद सरस्वती एक महान पुरुष थे। जिन्होंने अपने जीवन में भारत को जोड़ने और अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ाने का काम किया। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि दयानंद सरस्वती ने अनेक कुरीतियों को समाप्त किया और अपने ज्ञान से लोगों को सही राह दिखाई।

लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ना सिखाया और एकत्रित होकर अंग्रेजों का विरोध किया। अपने जीवन का हर पल देश सेवा और राष्ट्र सेवा में लगा दिया। इसलिए हर वर्ष संपूर्ण भारत वासियों की जयंती को मनाते हैं ऐसे वीर सपूतों को याद करते हैं।

दयानंद सरस्वती जी का जीवन परिचय :-

दयानंद सरस्वती भारत माता के उन वीर सपूतों में से एक हैं। जिन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की और भारतवासियों को सही राह पर अग्रसर किया। उन्होंने वेदों को सर्वोपरि माना।

जन्म : दयानंद सरस्वती

दयानंद सरस्वती जी का जन्म 12 फरवरी 1824 में टंकारा में हुआ था। जो कि वर्तमान समय में गुजरात में स्थित है।

माता पिता : दयानंद सरस्वती

दयानंद सरस्वती जी की माता का नाम यशोदाबाई तथा पिता का नाम करसन लालाजी था। दयानंद सरस्वती के पिता एक कलेक्टर होने के साथ-साथ ब्राह्मण परिवार की एक समृद्ध व्यक्ति थे।

स्वामी दयानंद सरस्वती के प्रमुख कार्य :-

दयानंद सरस्वती जी ने बहुत से समाज सुधार के कार्य किये । जिनके कारण आज संपूर्ण भारत वर्ष उनकी इस जयंती को मना रहा है।

बाल विवाह का विरोध || :-

भारत में पहले बाल विवाह बहुत अधिक मात्रा में होता था 12,13,14,15 वर्ष के लड़के-लड़कियों का विवाह होने लगता। जिसका विरोध स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने किया। उन्होंने 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के विवाह बंद करने की बात कही और दयानंद सरस्वती के कारण ही बाल विवाह पर रोक लगाई और लड़के लड़कियां पढ़ाई कर शिक्षा ग्रहण करने लगे।

सती प्रथा का विरोध :-

भारत में एक समय पर पति के मरने पर पत्नी को भी पति कि चिता पर जिंदा जला दिया जाता था। जिसका विरोध स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने किया और सती प्रथा को बंद करने की मांग की। समाज में स्त्रियों की समानता पर बल दिया। साथ ही सरस्वती जी ने कहा कि वेदो के अध्ययन का अधिकार स्त्रियों को उतना ही है, जितना कि पुरुषों को है।

नारी शिक्षा :-

दयानंद सरस्वती जी ने स्त्रियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितना पुरुषों को पढ़ना जरूरी है उतना ही स्त्रियों को पढ़ना भी जरूरी है, क्योंकि अगर एक पुरुष विकसित होता है। तो केवल वही अपने तक सीमित रहेगा लेकिन अगर एक स्त्री शिक्षित होती है। तो हमारा पूरा समाज शिक्षित होगा।

स्वामी दयानंद सरस्वती जी की मृत्यु :-

दयानंद जी ने अपने जीवन काल में बहुत से कार्य की तथा कुरीतियों का अंत करके समाज को एक नई दिशा दिखाई। कहते हैं – कि दयानंद सरस्वती का निधन एक वेश्या के कुचक्र से हुई। उनकी मृत्यु 30 अक्टूबर 1883 को दीपावली के दिन हुई। माना जाता है कि उनकी मृत्यु से पहले सरस्वती जी का अंतिम वाक्य था- “प्रभु

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