डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती || Dr.ambedker jayanti in hindi || now gyan

Dr. bhimrao ambedker jayanti in hindi : डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को मनाई जाती है। डॉक्टर अंबेडकर भारत के महान व्यक्तित्व में से एक थे। जिन्होंने समाज में फैली कुरीतियों का अंत किया तथा समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। भीमराव अंबेडकर की जयंती को भारत में ही नहीं अपितु विश्व में भी मनाया जाता है।

भीमराव अंबेडकर जयंती कब है ? :-

भीमराव अंबेडकर जयंती या भीम जयंती को 14 अप्रैल को के दिन संपूर्ण विश्व में एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस जयंती की आने वाली कुछ प्रमुख तिथियां निम्नलिखित हैं :-

S.No.जयंती || jayantiदिन || date
1.डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती 202014 अप्रैल 2020
2.डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती 202114 अप्रैल 2021
3.डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती 202214 अप्रैल 2022
4.डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती 202314 अप्रैल 2023
5.डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती 202414 अप्रैल 2024
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती तारीख

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जीवनी :-

भीमराव अंबेडकर जी एक महान नेता थे। जिन्होंने हर संभव प्रयास करते हुए। समाज से भेदभाव को दूर करने की एक मुहिम चलाई और समाज को एक नई राह और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाया। भारत की स्वतंत्रता तथा भारत के संविधान में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का एक अहम योगदान है।

जन्म: डॉक्टर भीमराव अंबेडकर :-

डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर जी का मूल नाम भीमराव था। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ डॉक्टर साहेब का जन्म अंबेडकर नगर (महू) में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और अनुशासित थे।

माता पिता: डॉक्टर भीमराव अंबेडकर :-

डॉ भीमराव जी की पिता का नाम रामजी मलोजी सकपाल तथा माता का नाम भीमाबाई सकपाल था। यह दोनों अत्यधिक बुद्धिमान व अनुशासित जिसका प्रभाव बचपन से ही डॉक्टर भीमराव जी पर पड़ता रहा और अपने जीवन में बहुत ही अनुशासित रहे।

आरंभिक जीवन: डॉक्टर भीमराव अंबेडकर :-

भीमराव अंबेडकर जी का जन्म महार दलित परिवार में हुआ था। उस समय समाज में भेदभाव,जातीय हिंसा छुआ-छूत जैसी कुरीति विद्यमान थी।भीमराव के परिवार वालों पर बहुत अत्याचार होते थे। यहां तक कि कोई भी उनके घर के सामने से नहीं गुजरता था। समाज वाले उन्हें नीच जाति का कहकर उनका अपमान किया करते थे।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की शिक्षा :-

भीमराव अंबेडकर जी एक नीच जाति से संबंध रखते थे। जिस कारण बचपन में उन्हें विद्यालय में दाखिला लेने के लिए बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जब भी किसी विद्यालय में दाखिले के लिए जाते तो उनसे उनकी जात पूछी जाती और जात बताने के पश्चात उन्हें दाखिला नहीं दिया जाता। बहुत कठिनाइयों के बाद एक विद्यालय में उन्हें दाखिला मिला तत्पश्चात उन्होंने अपनी शिक्षा आरंभ की।

माध्यमिक शिक्षा || secondary education :-

भीमराव जी की माध्यमिक शिक्षा मुंबई में स्थित एक सरकारी हाई स्कूल से हुई। जहां उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा को पूर्ण किया। तत्पश्चात 1906 में उनका विवाह हो गया और कठिन परिश्रम के बाद सन 1907 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।

उच्च शिक्षा || Higher education :-

डॉ भीमराव अंबेडकर ने कॉलेज में दाखिला लेने के बाद अछूत समाज में सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति बन गए। तब 1912 में तक भीमराव अंबेडकर जी ने मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा पूर्ण की और बड़ौदा राज्य सरकार के साथ काम करने लगे।

गरीबों के मसीहा डॉ भीमराव अंबेडकर :-

गरीबों का दुख दर्द सिर्फ वही समझ सकता है। जिसने गरीबी देखी हो अर्थात जो खुद गरीबी के बीच पला बड़ा हो वही गरीबों को समझ सकता है। कुछ ऐसे ही थे, हमारे डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी । जिनका बचपन बहुत ही गरीबी तथा एक नीच जाति की परिवार में बीता। बड़ी मेहनत के बाद उन्होंने पढ़ लिख कर एक वकील, तथा नेता बने। जिसके बाद उन्होंने देश से इस कुरीति को हटाने का निर्णय लिया जिस कारण से आज पूरी दुनिया उन्हें बाबासाहेब के नाम से जानती है।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की मृत्यु का कारण :-

यह कहा जाता है कि भीमराव अंबेडकर जी को भरी संसद में भरतपुर के राजा बच्चू सिंह ने गोली मारी थी। जिसके कारण भीमराव जी की मृत्यु हो गई और भीमराव जी की मृत्यु 1956 ईस्वी में हुई।

डॉक्टर अंबेडकर के जीवन से जुड़ा एक प्रमुख कहानी :-

एक बार जब भीमराव जी बचपन में नाई के पास गए। तो नाई ने उनसे उनकी जात पूछ ली और जब भीमराव जी ने अपनी जात बताई। तो उन्हें अपमानित करते हुए नाई ने उन्हें वहां से भगा दिया फिर। भीमराव ने घर आकर अपने पिताजी से पूछा कि – ” हमारी जात क्या है?” हर कोई हमारा अपमान क्यों करता है।

तो यह सुनकर उनके पिताजी ने कहा कि- हमारी नीच जात है इसलिए सब हमें अपमानित करते हैं। इस बात को सुनकर भीमराव जी ने यह ठान लिया कि वह पढ़-लिख कर एक दिन इस कुरीति को देश से मिटा देंगे और एक नए समाज की स्थापना करेंगे। इसके बाद भीम ने पढ़ाई शुरू की लेकिन विद्यालय में दाखिला मिलने में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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