महावीर जयंती 2021

महावीर जयंती 2021 || Mahavir Jayanti hindi mai || now gyan

Mahavir Jayanti in hindi: महावीर जयंती भगवान महावीर के नाम पर पूरी दुनिया में मनाई जाती है। महावीर का जन्म लगभग ढाई हजार साल पहले (599 ईसवी पूर्व) वैशाली की कुंडलपुर में हुआ था। कहा जाता है कि महावीर जी ने 30 वर्ष की उम्र में घर,राज्य तथा वैभव त्याग सन्यास धारण कर लिया।

महावीर जयंती मनाने का कारण :-

महावीर जयंती हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है। कहा जाता है की महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर थे ,तथा जिनका जीवन ही उनका संदेश है। महावीर स्वामी सत्य अहिंसा के उपदेश देते थे। जो कि एक खुली किताब के समान है। जैन धर्म के लोग महावीर जयंती को बड़े हर्ष-उल्लास के साथ मनाते हैं।

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स्वामी जी ने सदैव सत्य व अहिंसा का मार्ग चुना ,और यही संदेश वो लोगों को भी देते थे। महावीर स्वामी उपदेश देते थे, कि हमें जीवो से प्रेम करना चाहिए। उन्हें कभी नहीं मारना चाहिए, तथा उनका कहना था, कि अगर किसी को हमारी मदद की आवश्यकता है,और हम उसकी मदद करने में सक्षम है ,फिर भी हम उसकी मदद ना करें तो यह भी एक हिंसा मानी जाती है। ऐसे विचार रखने वाले स्वामी को हर वर्ष याद करके उनकी जयंती मनाई जाती है ।

महावीर जयंती की तारीख || date of mahavie jayanti :-

S.No.जयंती || jayantiदिन || date
1.महावीर जयंती 202125 अप्रैल 2021
2.महावीर जयंती 202214 अप्रैल 2021
3.महावीर जयंती 20234 अप्रैल 2021
4.महावीर जयंती 202421 अप्रैल 2021
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कैसे मनाई जाती है? महावीर जयंती :-

महावीर जयंती को मनाने वाले अधिकतर जैन धर्म के लोग होते हैं। इसको मनाने की विधि :-

  • सर्वप्रथम महावीर जयंती के दिन जैन मंदिरों में महावीर स्वामी की मूर्तियों का अभिषेक करते हैं ।
  • कहते हैं कि इसके बाद महावीर स्वामी की मूर्ति को रथ पर बैठाकर जुलूस निकाला जाता है ।
  • महावीर जयंती के दिन गरीब व जरूरतमंदों की मदद की जाती है ।

महावीर स्वामी की जीवनी || biograpgy of mahavir swami in hindi :-

माता-पिता / मूल नाम :-

महावीर स्वामी के पिता का नाम राजा सिद्धार्थ तथा उनकी माता का नाम त्रिशला था। महावीर स्वामी जी का मूल नाम वर्द्धमान था,और यह जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक हैं ।

ज्ञान प्राप्ति व शिक्षा :-

महावीर स्वामी ने मार्गशीर्ष दसवीं को कुंडलपुर में दीक्षा की प्राप्ति की। दीक्षा प्राप्ति के बाद 12 वर्ष 6 महीने तक कठिन तप करने के बाद वैशाख शुक्ल दशमी को ऋजुबालुका नदी के किनारे साल वृक्ष के नीचे भगवान महावीर को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। ऐसे कर महावीर स्वामी ने अपने ज्ञान से मानव जाति का कल्याण किया।

महावीर जयंती

महावीर स्वामी जयंती पर प्रेरक प्रसंग :-

एक बार महावीर स्वामी जंगल में तप कर रहे थे। तो वहां से कुछ चारवाहे जा रहे थे। चरवाहों ने महावीर स्वामी को वहां तप करते हुए देखा,उन चरवाहों को तप के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं था। तो उन्होंने महावीर स्वामी को देखकर उनका मजाक उडाया,लेकिन महावीर स्वामी अपने तप से भंग नहीं हुए ।

वह चारवाहे गांव वालों को बुलाकर लाए,और जैसे ही सारे गांव वाले पहुंचे तो महावीर स्वामी ने आंखें खोली। सभी गांव वालों ने महावीर स्वामी को प्रणाम करते हुए कहा,की इन चरवाहों ने आपकी तपस्या भंग की, ये नासमझ हैं। इनकी ओर से हम सब आपसे माफी मांगते हैं, और हम सब आप के लिए एक मकान बनाएंगे जहां आपके तप में कोई भी विघ्न नहीं करेगा।

महावीर जी उनकी बात ध्यान से सुन रहे थे, और बोले कि यह चारवाहे भी मेरे अपने ही हैं। यदि बच्चे अपने माता-पिता का मुंह प्यार से अपने छोटे छोटे हाथों से नोचते हैं, तो क्या माता-पिता उसे अपनी गोद में लेने से मना कर देते हैं, नहीं ना आपको मेरे लिए घर बनाने की आवश्यकता नहीं है। आप इस धन का उपयोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए करें। ऐसे विचार रखने वाले थे महावीर स्वामी।

महावीर स्वामी जी की मृत्यु का कारण :-

स्वामी जी स्वयं भगवान के अवतार के रूप में जन्मे थे। उन्होंने संपूर्ण मानव जाति को अहिंसा व सत्य का मार्ग दिखाया,और अपना राज-पाठ वैभव सब कुछ छोड़कर सन्यास ले लिया था। महावीर स्वामी ने संपूर्ण मानव हित के लिए कार्य किया,और अंत में 72 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हुई।

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