मुंशी प्रेमचंद्र जयंती

मुंशी प्रेमचंद्र जयंती || Munshi Premchand Jayanti in hindi || nowgyan

Munshi Premchand Jayanti hindi mai: हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि-कहानीकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती प्रतिवर्ष 31 जुलाई मनाई जाती है। मुंशी जी पूरी दुनिया में विख्यात हुए तथा उन्हें कथा-सम्राट के नाम से भी जाना जाता है। आज उनके साहित्य तथा कहानियां लगभग सभी लोग पढ़ते हैं। प्रेमचंद्र जी ने अपने जीवन काल में 12 से ज्यादा उपन्यास तथा 250 से ज्यादा कहानियां लिखी। सत्यजीत राय ने उनकी कहानियों को बड़े पर्दे पर भी उतारा है।

कब मनाई जाती है? मुंशी प्रेमचंद्र जी की जयंती :-

मुंशी प्रेमचंद्र जयंती प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को मनाई जाती है। यह दिन हिंदी कथा साहित्य का एक महत्वपूर्ण दिन है। जिस दिन हिंदी कथा साहित्य की सम्राट का जन्म हुआ। इस वर्ष हम उनकी 140 वीं जयंती मना रहे हैं।

S.No.जयंती || jayantieदिन || day
1.मुंशी प्रेमचंद्र जयंती 202131 जुलाई 2021
2.मुंशी प्रेमचंद्र जयंती 202231 जुलाई 2022
3.मुंशी प्रेमचंद्र जयंती 202331 जुलाई 2023
4.मुंशी प्रेमचंद्र जयंती 202431 जुलाई 2024
5.मुंशी प्रेमचंद्र जयंती 202531 जुलाई 2025
Munshi Premchanchand Jayanti hindi-mai

क्यों मनाई जाती है? मुंशी प्रेमचंद जयंती :-

मुंशी प्रेमचंद्र जी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। जिनकी बहुत सी रचनाएं विश्व प्रसिद्ध हुई। उनकी सभी कहानियां लोगों को पसंद आती थी। इस महान साहित्यकार को याद करते हुए संपूर्ण भारत में 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद्र जी की जयंती को मनाया जाता है।

कैसे मनाई जाती है मुंशी प्रेमचंद्र जयंती :-

मुंशी प्रेमचंद्र जी की जयंती को सरकारी कार्यालयों तथा विद्यालयों में मनाया जाता है। इस दिन सर्वप्रथम मुंशी प्रेमचंद्र जी की तस्वीर पर माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। उसके पश्चात विद्यालयों में मुंशी प्रेमचंद्र की जीवनी पर शिक्षकों तथा कुछ छात्रों द्वारा भाषण दिया जाता है। उसके बाद विद्यालयों में मुंशी प्रेमचंद्र जी पर निबंध प्रतियोगिता तथा अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष की भांति यह जयंती प्रत्येक वर्ष मनाई जाती है।

मुंशी प्रेमचंद्र जी की जीवनी || premchan ka jivan parichya :-

जन्म || born- birthdate :

हिंदी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद्र जी का बचपन का नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। बाद में यह मुंशी प्रेमचंद्र जी के नाम से जाने जाने लगे।

माता-पिता || Mother father :

मुंशी प्रेमचंद्र जी के पिता का नाम मुंशी अजायब राय तथा उनकी माता का नाम आनंदी देवी थ। मुंशी प्रेमचंद जी के पिता उत्तर प्रदेश के गांव में डाक मुंशी थे।

पत्नी-बच्चे || wife-childrens :

प्रेमचंद्र जी की शादी शिवरानी देवी से हुई। विवाह के बाद प्रेमचंद्र शिवरानी देवी जी के बच्चे हुए। जिनका नाम अमृतराय, श्रीपतराय व कमला देवी था।

मुंशी प्रेमचंद्र जी की शिक्षा || Education of munsi-premchand ji :-

मुंशी प्रेमचंद जी की प्रारंभिक शिक्षा फ़ारसी भाषा से शुरू हुए। मुंशी प्रेमचंद्र जी 7 साल के थे, तभी से उन्होंने लालपुर की मदरसा में शिक्षा प्राप्त करना प्रारंभ किया। लेकिन जब मुंशी प्रेमचंद्र जी केवल 8 साल के थे। तब उनकी मां किसी लंबी बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त हो गई।

उसके बाद उनकी संपूर्ण जिम्मेदारियां उनकी दादी के ऊपर आ गई। तत्पश्चात दादी ने उनका पालन-पोषण किया और कुछ समय पश्चात उनकी दादी का भी निधन हो गया। तब से खुद को बड़ा अकेला महसूस करने लगे और जैसे-तैसे कर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। प्रेमचंद्र जी ने 1890 के मध्य में क्वीन कॉलेज में एडमिशन लिया।

मृत्यु || Death :-

प्रेमचंद्र जी ने अपने जीवन काल में बहुत ही उपन्यास व कहानियां लिखी और विश्व में प्रसिद्धि प्राप्त की। उनकी मृत्यु 8 अक्टूबर 1950 को हुई।

मुंशी प्रेमचंद जी के प्रमुख उपन्यास :-

  1. सेवासदन [sevaasadan]
  2. निर्मला [ Nirmala ]
  3. रंगभूमि [ Ranghbhumi ]
  4. कर्मभूमि [ Karmbhumi ]
  5. गबन [ Gaban ]
  6. गोदान [ Godan ]
  7. मंगलसूत्र [ Mangalshutra ]
  8. प्रतिज्ञा [ Partigya ]
  9. वरदान [ Vardan ]
  10. रूठी-रानी [ Ruthi-Rani ]

मुंशी प्रेमचंद्र जी के अनमोल वचन || Munsi ji ke anmol vachan :-

देश का उद्धार ब्लासियो द्वारा नहीं हो सकता |

उसके लिए सच्चा त्यागी होना पड़ेगा ||

मुंशी प्रेमचंद्र

चिंता एक काली दीवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है |

जिसे निकलने की फिर कोई गली नहीं सोचती सोजती सोचती ||

मुंशी प्रेमचंद्र

सौभाग्य को प्राप्त होता है जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं |

मुंशी प्रेमचंद्र

आज से बाहर हूं है जिसका रोगी कभी ठीक नहीं हो सकता |

मुंशी प्रेमचंद्र

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