यशोदा माता जयंती

यशोदा माता जयंती || Yashoda Mata Jayanti hindi mai || now gyan

Yashoda Mata Jayanti in hindi: यशोदा माता जयंती फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को अर्थात 4 मार्च को हर वर्ष मनाई जाती है। इस जयंती को दुनिया हर्ष के साथ कृष्ण जी के सभी मंदिरों में मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं अपनी संतान के मंगल- कुशल व लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। यह त्यौहार ज्यादातर गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों में बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यशोदा माता जयंती तारीख :-

s.no.जयंती || jayantiदिन || day
1.यशोदा माता जयंती 20214 मार्च 2021
2.यशोदा माता जयंती 20224 मार्च 2022
3.यशोदा माता जयंती 20234 मार्च 2023
4.यशोदा माता जयंती 20244 मार्च 2024
5.यशोदा माता जयंती 20254 मार्च 2025
यशोदा-माता-जयंतीकब-है?

यशोदा माता जयंती का महत्व :-

माता यशोदा भगवान श्री कृष्ण की अपनी माता नहीं थी। उनकी अपनी माता का नाम देवकी था, परंतु उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था। इसीलिए उनकी माता यशोदा को कहा जाता है। यशोदा माता जयंती का सबसे बड़ा महत्व यह है, कि मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त इस दिन मां यशोदा की पूजा करते हैं उन्हें सुंदर और यशस्वी संतान की प्राप्ति होती है, तथा जो लोग संतान संबंधित परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनके लिए भी यशोदा माता जयंती बहुत अनुकूल मानी गई है । अनेक ज्योतिषियों का कहना है कि मां यशोदा और कृष्ण भगवान की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

यशोदा माता जयंती पूजा विधि :-

माता यशोदा की जयंती की पूजा विधि इस प्रकार होती है :-

  • यशोदा मैया जयंती के दिन प्रातः उठकर स्नान आदि करने के बाद यशोदा माता का ध्यान करना चाहिए।
  • पूजा के लिए माता यशोदा की भगवान श्री कृष्ण की गोद में लिए हुए तस्वीर स्थापित करनी चाहिए।
  • मां यशोदा को लाल चुन्नी अर्पित करनी चाहिए।

यशोदा माता जयंती का शुभ समय :-

माता यशोदा जी की जयंती को सभी स्त्री-पुरुष बड़े धूमधाम से मनाते हैं। और अपने बच्चों की कामना करते हुए भगवान श्री कृष्ण और माता यशोदा की पूजा करते हैं। इसका शुभ समय 4 मार्च रात 12 बजकर 21 मिनट से षष्ठी तिथि रात 9:58 मिनट पर होता है ।

माता यशोदा को श्री कृष्ण पुत्र के रूप में कैसे प्राप्त हुए :-

मान्यता के अनुसार माता यशोदा ने अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु की तपस्या की और भगवान विष्णु ने माता यशोदा को वरदान दिया था। कि वह खुद यशोदा माता के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे, लेकिन भगवान विष्णु ने जन्म देवकी की कोख से लिया। देवकी कंस की बहन थी। और उसके पति वासुदेव थे।

कंस ने अपनी बहन को और उसके पति वासुदेव को कैद में रखा। इसका कारण यह था कि देवकी की शादी के समय यह आकाशवाणी हुई। कि देवकी का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु करेगा। आकाशवाणी से भयभीत होकर कंस ने अपनी सगी बहन और उसके पति को बंदी बना लिया। उसने देवकी की 7 संतानों की हत्या कर दी, लेकिन जब आठवीं संतान हुई तो वासुदेव ने उसे गोकुल नंद बाबा और यशोदा मैया के पास रखकर उनकी संतान को लेकर वापिस आ गए।

उसके बाद कृष्ण का पालन पोषण माता यशोदा मैया ने किया। और कृष्ण ने माता यशोदा और नंद बाबा की सेवा की ,और गोकुल में गाय और अपने मित्र के साथ रहकर उनका नाम ग्वाला( gauwala) पड़ गया। माता यशोदा कृष्ण भगवान को लल्ला कहकर पुकारती थी। विष्णु भगवान ने उन्हें जो वरदान दिया था वह वरदान पूर्ण हो गया। कृष्ण ने गोकुल वासियों की मदद की और उन पर आने वाले हर संकट को दूर किया, तथा कंस को मार डाला और दुनिया को उसके पाप ,अधर्म से मुक्त करवाया। आज पूरी दुनिया भगवान श्री कृष्ण और माता यशोदा के पुत्र प्रेम की गाथा गाते हैं । और माता यशोदा जैसी मां बनना चाहती है। ईश्वर से प्रार्थना करती है। उन्हें भगवान श्री कृष्ण जैसा पुत्र प्राप्त हो। इसलिए माता यशोदा जयंती( mata yasoda jayanti) के दिन व्रत रखते हैं।

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