रानी दुर्गावती जयंती || Rani Durgavati Jayanti in hindi ||

रानी दुर्गावती भारत की महान वीरांगना थी। इन्होंने मध्य प्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र में शासन किया। दुर्गावती को बंदूक तथा तीर चलाने का अच्छा अभ्यास था। रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में बहुत उन्नति की तथा उत्कृष्ट कार्य किए थे, क्योंकि कहते हैं कि भारत के इतिहास में महिलाओं की शौर्य गाथा , कौशल , पराक्रम वीरता जैसे बहुत गुणों का योगदान रहा है। भारत की महिलाएं कभी कमजोर नहीं रही है। ऐसी ही एक महिला रानी दुर्गावती थी।

रानी दुर्गावती जयंती कब मनाई जाती है :-

दुर्गावती रानी की जयंती 5 अक्टूबर को मनाई जाती है

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1.रानी दुर्गावती जयंती 20205 अक्टूबर 2020
2.रानी दुर्गावती जयंती 20215 अक्टूबर 2021
3.रानी दुर्गावती जयंती 20225 अक्टूबर 2022
4.रानी दुर्गावती जयंती 2023 5 अक्टूबर 2023
5.रानी दुर्गावती जयंती 20245 अक्टूबर 2024
6.रानी दुर्गावती जयंती 2025 5 अक्टूबर 2025
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क्यों है महत्वपूर्ण रानी दुर्गावती जयंती :-

रानी दुर्गावती एक वीर शासक थी। कहते हैं की महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा की एकमात्र संतान थी। दुर्गाष्टमी पर जन्म लेने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया था।

  1. दुर्गावती अपने नाम के अनुरूप ही साहसी तथा शौर्य के कारण प्रसिद्ध थी।
  2. सौंदर्य तथा पराक्रम के कारण इनकी प्रसिद्धि सब जगह फैल गई इन्हीं कारणों से इनकी जयंती 5 अक्टूबर को मनाई जाती है।

रानी दुर्गावती की जीवनी :-

रानी दुर्गावती अपने शासनकाल में बहुत प्रसिद्ध हुई। उन्होंने महिला शासक होकर भी पुरुषों से बहुत ही अच्छे तरीके से राज्य संभाला।

जन्म :रानी दुर्गावती-

रानी दुर्गावती का जन्म5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर में हुआ था। वह बहुत सुंदर व शौर्य साली थी।

माता-पिता :रानी दुर्गावती-

रानी दुर्गावती के पिता चंदेल वंश के सबसे बड़े शासक थे। इनके पिता का नाम – कीरत राय था। इनकी माता का नाम पता नहीं चला।

पति-पुत्र :रानी दुर्गावती-

रानी दुर्गावती के पति का नामदलपत शाह था। रानी दुर्गावती ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम वीरनारायण रखा गया। उसके बाद राजा दलपत शाह कि मृत्यु 1550 में हो गई, तब वीर नारायण सिर्फ 5 साल के थे। दुर्गावती ने अपने पति की मृत्यु के बाद अपने पुत्र को राजगद्दी पर बैठा कर खुद राज्य की शासक बनी।

मृत्यु :रानी दुर्गावती-

कहा जाता है कि अकबर की सेना ने रानी दुर्गावती पर कई बार हमला किया, लेकिन अकबर की सेना को रानी दुर्गावती ने खदेड़ कर रख दिया, वही एक महिला शासक से पराजित होने के बाद असफ खां क्रोध से भर गया, और इस बार रानी दुर्गावती के राज्य पर आक्रमण कर दिया, और छल कपट के साथ पूरे राज्य को घेर लिया, तथा युद्ध में विजय के लिए बड़ी-बड़ी तोपों को भी शामिल किया। वही रानी दुर्गावती भी पूरी तैयारी के साथ युद्ध स्थल पर पहुंची, तथा दुर्गावती ने वीरता के साथ युद्ध लड़ा इस युद्ध में उनके वीर पुत्र – वीरनारायण भी शामिल थे ,लेकिन वीर नारायण और दुर्गावती दुश्मनों के विरुद्ध लड़ते-लड़ते घायल हो गए। रानी दुर्गावती तनिक भी विचलित नहीं हुई। उनके सैनिकों के साथ लड़ती रही। रानी दुर्गावती की आंख पर तीर लग गया। सैनिकों ने रानी दुर्गावती को वापस महल जाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया, और लड़ती रही ,लेकिन आखिरकार जब पूरी तरह से रानी घायल हो गई तो ज्यादा रक्त बहने से उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु 1564 ई में हुई।

जन्म 5 अक्टूबर
जन्म स्थल –कालिंजर
पिता का नाम –कीरत राय
पति का नाम दलपत शाह
पुत्र का नाम –वीरनारायण
मृत्यु –1564 ई
रानी-दुर्गावती-की-जीवनी

रानी दुर्गावती के महत्वपूर्ण कार्य :-

दुर्गावती ने अपने शासनकाल में बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किए। जिनके कारण आज भी रानी दुर्गावती प्रसिद्ध है। रानी दुर्गावती न केवल एक बेहतरीन शासक के रूप में उभरी बल्कि उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि महिलाएं किसी पुरुष से कम नहीं होती।

रानी दुर्गावती के कुछ महत्वपूर्ण कार्य :-

  1. उन्होंने अपने बेटे को सिंहासन पर बिठाया और खुद गोंडवाना की बागडोर अपने हाथ में ले ली।
  2. रानी दुर्गावती ने बहुत से मठ, कुएं, बावड़ी तथा धर्मशाला को बनवाया। इस प्रकार रानी दुर्गावती एक महान शासक बनी जिन्हें आज सभी याद करते हुए 5 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाते हैं।

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