श्री हित हरिवंश चंद्र जयंती | | Shri Hit Harivansh Chandra Jayanti hindi

भारत की इस पवित्र धरती पर एक महापुरुषों ने जन्म लिया। ऐसे ही एक महापुरुष श्री हित हरिवंश चंद्र जी भी है। कहा जाता है कि श्री हित हरिवंश चंद्र जी 16वीं शताब्दी के आविभूर्त विभूतियों में से एक महान विभूति थे। उन्होंने अद्भुत आचरण चरित्र के द्वारा भक्ति,काव्य,संगीत आदि के क्षेत्र में क्रांतिकारी मोड़ दिए, तथा वह तत्कालीन रसिक समाज में श्रीजी,श्रीजू ,इत्यादि नामों से प्रख्यात थे।

श्री हित हरिवंश चंद्र जयंती कब मनाई जाती है :-

हरिवंश जी की जयंती के पीछे कई विद्वानों का मत है। कि इनकी जयंती वैशाख शुक्ल एकादशी के दिन मनाई जाती है। उसी दिन का जन्म हुआ था। इनके महान आचरण व चरित्र तथा इन्हें भगवान मानकर इनकी जयंती हर वर्ष मनाई जाती है।

हित हरिवंश चंद्र जी की जीवनी :-

श्री हित हरिवंश जी एक महान व्यक्ति थे। यह अपने अद्भुत चरित्र व ज्ञान के लिए जाने जाते हैं, तथा उन्होंने रूस भक्ति को ब्रजभाषा का अत्यंत आकर्षित उपास्य बनाया।

जन्म1530
जन्म स्थल‘बाद’ गावँ
माता का नामश्रीमती तारारानी
पिता का नामश्री व्यास मिश्र
मृत्यु1609
हरिवंश-चंद्र-जी-की-जीवनी

जन्म: श्री हित हरिवंश चंद्र

श्री हित हरिवंश जी का जन्म वैशाख शुक्ल एकादशी विक्रम संवत् 1530 को मथुरा से 12 कि॰मी॰ दूर आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित ‘बाद’ गावँ में हुआ था।

माता-पिता: श्री हित हरिवंश चंद्र

श्री हित हरिवंश चंद्र जी के पिता का नामश्री व्यास मिश्र जी था ,तथा इनकी माता का नाम तारारानी था। कहते हैं कि श्री हित हरिवंश चंद्र जी के पिता व्यास मिश्र के 9 भाई थे। जिसमें से एक भाई सन्यासी थे

बचपन: श्री हित हरिवंश चंद्र

श्री हित हरिवंश चंद्र जी ने बचपन से ही अनेकानेक विलक्षण प्रतिभाएं थी। हरिवंश महाप्रभु जी राधा रानी को अपना ईष्ट के साथ गुरु भी मानते थे। हरिवंश जी राधा रानी का नाम सुनते ही खुश हो जाते थे।

मृत्यु: श्री हित हरिवंश चंद्र-

श्री हित हरिवंश चंद्र जी की मृत्यु1609 (सन 1552 ईस्वी)को वृंदावन में हुई।

हित हरिवंश चंद्र के महत्वपूर्ण कार्य :-

हित हरिवंश जी ने अपने जीवन काल में बहुत से महत्वपूर्ण कार्य किए।

  1. श्री हित हरिवंश ने कृष्ण से जुड़े स्थलों के चिन्हिकरण का कार्य वृंदावन में किया।
  2. हरिवंश जी ने रास मंडल , सेवा कुंज , वंशीवट , धीर समीर , मान सरोवर , हिंडोल स्थल , श्रृंगार वट , वन लीला आदि स्थलों का परिचय लोगों को करवाया।
  3. उन्होंने बृज भाषा के साथ ही संस्कृत भाषा में भी कई रचनाएँ लिखी।
  4. श्री हित हरिवंश जी ने संस्कृत भाषा में राधा सुधा निधि लिखी इसमें 270 श्लोक है।

अनमोल वचन :-

पैर की मोच और छोटी सोच हमें आगे बढ़ने नहीं देती।

टूटी कलम और औरों से जलन खुद का भाग्य लिखने नहीं देती।

श्री हित हरिवंश चंद्र।

काम का आलस और पैसों का लालच हमें महान नहीं बनने देता।

अपना मजहब ऊंचा और गैरों का छोटा ये सोच हमें इंसान बनने नहीं देती।

श्री हित हरिवंश चंद्र।

Leave a Comment

Your email address will not be published.