संत कबीर दास जयंती || Sant Kabir Das Jayanti in hindi || now gyan

भारत की पावन भूमि पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया। जिनमें से एक संत कबीर दास जी भी है। कबीर दास जी मध्य काल के महान कवि थे। इनकी जयंती प्रतिवर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। कहा जाता है कि भक्ति काल के उस दौर में कबीर दास जी नें अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार में लगा दिया।

संत कबीर दास जयंती कब मनाई जाती है :-

कबीर दास जी की जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाती है।

s.no. जयंती || Jayanti दिन || day
1.संत कबीर दास जयंती 201917 जून
2.संत कबीर दास जयंती 20205 जून
3.संत कबीर दास जयंती 202124 जून
4.संत कबीर दास जयंती 202214 जून
5.संत कबीर दास जयंती 20234 जून
6.संत कबीर दास जयंती 2024 22 जून
7.संत कबीर दास जयंती 202511 जून
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क्यों मनाई जाती है ? संत कबीर दास जयंती :-

कबीर दास मध्यकालीन युग के प्रसिद्ध,धार्मिक कवि थे। उनकी रचनाएं आज भी पढ़ी जाती है, तथा कबीर जी एक महान संत भी थे। उनकी याद में कबीर दास जयंती मनाई जाती है। इस महान संत का कहना था कि भगवान हर इंसान में होता है ,कोई मंदिर मस्जिद ,जंगलों में नहीं होता है। इस प्रकार कबीर जी बहुत महान व्यक्ति थे।

कबीर दास जी का जीवन परिचय :-

कबीर दास 15 सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे।

जन्म : कबीर दास जी

कबीर दास जी का जन्म -1398 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था।

कबीर दास जी के माता पिता :-

कबीर दास जी के पिता का नाम नीरू तथा माता का नामनीमा था।

शिक्षा : कबीर दास जी

कबीर दास जी को पढ़ने लिखने में बिल्कुल भी रूचि नहीं थी। माता-पिता बहुत गरीब थे, इसीलिए वह अच्छी पाठशाला में नहीं पढ़ सकते थे। भोजन के लिए कबीर जी को दर-दर भटकना पड़ता था। इसी कारण कभी-कभी वह किताबी शिक्षा नहीं ले सकते थे, तथा आज हम जिस कबीर के दोहे के बारे में पढ़ते हैं। वह स्वयं कबीर नहीं बल्कि उनके शिष्यों ने लिखा है। कबीर जी के शिष्यों के नाम कामात्य और लोई था।

कबीर दास जी का वैवाहिक जीवन-विवाह-पत्नी व बच्चे :-

संत कबीर दास जी का विवाह एक लोई नामक कन्या के साथ हुआ। विवाह के बाद दोनों को संतान हुई। जिसमें एक लड़का हो दूसरी लड़की थी। कबीर जी के लड़के का नामकमाल तथा लड़की का नामकमाली था।

कबीर दास जी की मृत्यु :-

पुरानी मान्यता के अनुसार कहा जाता था कि काशी में जो अपने प्राण त्यागता है, उसको स्वर्ण की प्राप्ति होती है ,और जिसकी मृत्यु मगहर में होती है, उसे नरक मिलता है। इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए संत कबीर दास अपने अंतिम दिनों में मगहर चले गए वहीं उनकी मृत्यु हो गई।

कबीर दास जी की प्रमुख पुस्तकें :-

बीजक , सुखनिधन , होलीआगम , सबद , साखी व रक्त शामिल है।

कबीर दास जयंती के लिए दोहे :-

अपने को परखो दूसरे को नहीं
बुरा जो देखन मैं चला
बुरा न मिलिया कोय

प्रेम ही सच्चा ज्ञान पोथी पढ़ी पढ़ी
जग मुआ पंडित भया
न कोय

बात के अर्थ को ग्रहण करें
साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय

संतोषी सदा सुखी चाह मिटी
चिंता मिटी मनवा बेपखाह

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