डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवन परिचय

डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय | now gyan

डॉ राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे, और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी भी थे। राष्ट्रीय राष्ट्रपति पद पर रहकर उन्होंने भारत को विकास के मार्ग पर अग्रसर करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम भी उठाए।

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी भूमिका निभाई।
  • भारत के प्रथम मंत्री मंडल में उन्होंने खाद्य मंत्री का दायित्व भी संभाला
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डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय माता-पिता,शिक्षा,विवाह आदि :-

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय निम्नवत दिया गया है जिसे आप पढ़ सकते हैं :

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्म तथा परिवार:-

  1. मूल नाम/पूरा नाम – डॉ राजेंद्र प्रसाद
  2.  माता का नाम – श्री कमलेश्वरी देवी
  3. पिता का नाम – श्री महादेव सहाय
  4. जन्म तिथि – 3 दिसंबर 1884
  5. जन्म स्थान – बिहार के जिला जीरदोई  गांव में 
  6. पत्नी का नाम – राजवंशी देवी
  7. पुत्र का नाम – मृत्युंजय प्रसाद

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का संपूर्ण परिवार :-

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सिवान जिले की जिला जीरदोई  गांव में हुआ था उनके पिता का नाम महादेव साए तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी का राजेंद्र प्रसाद अपने बड़े भाई-बहनों में सबसे छोटे थे तथा उनका विवाह 12 वर्ष की कम उम्र में हो गया था उनकी पत्नी का नाम राजवंशी देवी था।

डॉ राजेंद्र प्रसाद की शिक्षा :-

प्रारंभिक शिक्षा :-

डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव के एक सामुदायिक विद्यालय में हुई 5 वर्ष की आयु में उन्हें उनकी सामुदायिक प्रथा के अनुसार एक मौलवी के पास भेज दिया गया मौलवी ने उन्हें फांसी स्काई तत्पश्चात उन्हें अंकगणित का हिंदी भी सिखाई गई।

माध्यमिक शिक्षा:-

डॉ राजेंद्र प्रसाद एक मेधावी छात्र थे तथा उन्होंने कोलकाता की प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करके कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया जहां पर उन्हें ₹30 प्रति माह की छात्रवृत्ति मिलती थी।

उच्च शिक्षा:-

 वर्ष 1902 में उन्होंने कोलकाता की प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया यहां उनकी मुलाकात महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु से हुई। तब उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र को छोड़कर कला के क्षेत्र में m.a. तथा कानून में मास्टर्स की शिक्षा ली।

डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवन परिचय
डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवन परिचय

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का राजनीति में प्रवेश:-

अपनी शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी ने भारतीय राजनीति में प्रवेश किया

  • 1905 में बड़े भाई महेंद्र के कहने पर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।
  • सतीश चंद्र मुखर्जी तथा बहन निवेदिता के कहने पर उन्होंने डॉन सोसाइटी को भी ज्वाइन किया।

गांधीजी के संपर्क में आने के बाद उन्होंने आजादी के लिए संघर्ष करने का फैसला लिया, और बहुत से महत्वपूर्ण आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन भी किया।

  • गांधी जी के साथ मिलकर उन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।
  • डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार कर लिया गया

15 जनवरी 1934 को बिहार में आए विनाशकारी भूकंप भूकंप के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। तब जेल से रिहा होने के कुछ दिन पश्चात ही उन्होंने राहत कार्य प्रारंभ कर दिया था। राहत कार्य के लिए 3लाख 80हजार की धनराशि भी एकत्र की।

डॉ राजेंद्र प्रसाद व हिंदी साहित्य :-

वैसे तो डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी की पढ़ाई उर्दू, फारसी में हुई। लेकिन उच्च शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा में उन्हें हिंदी से प्रेम हो गया था। साथ ही वे संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन भी करते थे।

  • डॉ राजेंद्र प्रसाद हिंदी पत्रिकाओं( भारत मित्र, भारतोदय, कमला) के लिए लेख भी छपते थे।
  • 1920 ईस्वी में बिहार प्रदेशीय तथा 1927 में उत्तर प्रदेशीय के हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति भी थे।
  • उन्होंने हिंदी के “देश” तथा अंग्रेजी के “पटना लो विकीली” जैसे समाचार पत्रों का संपादन भी किया।

डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रमुख कृतियां :-

प्रसाद जी ने अपने संपूर्ण जीवन काल में बहुत सी पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया तथा बहुत सी पुस्तकें भी लिखी उनके द्वारा डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा लिखी गई प्रमुख कृतियों की सूची निम्नवत है :

डॉ राजेंद्र प्रसाद प्रथम राष्ट्रपति के रूप में :-

1939 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्तीफे के बाद उन्होंने अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।तब राजेंद्र प्रसाद का प्रथम राष्ट्रपति के रूप में सफर प्रारंभ हुआ :

  • जुलाई 1946 ईस्वी को उन्हें संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया।
  • आजादी के ढाई साल बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया और राजेंद्र प्रसाद को प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
  • 12 साल की सेवा के बाद 1962 में डॉ राजेंद्र प्रसाद सेवानिवृत्त हुए।

डॉ राजेंद्र प्रसाद व भारत रत्न :-

12 वर्ष की सेवा करने के उपरांत सन 1962 ईस्वी में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया यह पुरस्कार उनकी सेवा को प्रदर्शित करता है। जो उन्होंने मातृभूमि के लिए किया।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का निधन :-

28 फरवरी 1963 को पटना की सदाकत आश्रम में उनका निधन हुआ है उन्होंने अंतिम सांस तक राष्ट्र की सेवा की राजेंद्र प्रसाद का निधन तो हो गया लेकिन प्रत्येक भारतवासी के दिल में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद आज भी जीवित हैं तथा अपने खून का हर एक अंश उन्होंने देश को समर्पित किया।

डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवन परिचय
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FAQ SECTION ON THIS TOPIC :

डॉ राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति कब बने थे ?

1940 के नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इस्तीफा देने के बाद अध्यक्ष रूप में कार्य किया। तत्पश्चात आजादी के बाद 1950 में प्रथम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। 

डॉ राजेंद्र प्रसाद की व्यक्तित्व की क्या विशेषताएं थी?

उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं निम्न है :
1- वे साधारण जीवन जीते थे तथा उच्च विचार रखे थे
2 – डॉ राजेंद्र प्रसाद जी भाषा प्रेमी थे। 
3 – उन्हें मातृभूमि से अत्यधिक लगाव था।
4 – उनकी लेखन में विशेष रूचि थी।

राजेंद्र प्रसाद के बचपन का नाम क्या था?

डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को प्यार से राजेंद्र बाबू के नाम से पुकारा जाता है। 

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल कितना रहा?

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल स्वतंत्रता के बाद 1950 से 1962 तक 12 वर्ष का रहा।

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