इटली का एकीकरण

इटली का एकीकरण || Italian unification in hindi || now gyan

इटली का राष्ट्रीय एकीकरण आधुनिक यूरोप के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना है। इटली की एकता को स्थापित करने के लिए अनेक देशभक्तों ने उल्लेखनीय प्रयत्न किए।  इन देशभक्तों में चार   ज्युसेपे मेत्सिनी , गैरीबाल्डीकावूर तथा विक्टर इमैनुअल को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हैं।

इटली का एकीकरण || इटली-का-एकीकरण-हिंदी-में ||  Italy ke ekikaran
इटली-का-एकीकरण-हिंदी-में

इटली के एकीकरण में काबूर का योगदान :-

काउंट कैमिलो दे कावूर ने इटली के एकीकरण में  महत्वपूर्ण योगदान दिया। कावूर को एक कुशल राजनीतिज्ञ माना जाता था। तथा उसने अपने अथक प्रयासों के साथ इटली के एकीकरण में योगदान दिया।

इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का योगदान :- 

गैरीबाल्डी ने भी इटली के एकीकरण में  अपना अहम योगदान दिया। गैरीबाल्डी खूब इटली की सेना का निर्माता भी कहा जाता है। उसने इटली में नव युवकों के अंदर देशभक्ति की भावना को जागृत किया और उनसे एक सेना का निर्माण किया। जिसका प्रयोग उसने इटली के एकीकरण में किया । 

इटली के एकीकरण में किस किस ने भूमिका निभाई :- 

इन देशभक्तों में चार नेताओं मेसिनी, गैरीबाल्डी, कावूर तथा विक्टर इमैनुअल को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हैं। ज्युसेपे मेत्सिनी , को इटली की एकता का पैगम्बर, गैरीबाल्डी को इटली की सेना का निर्माता, कावूर को एक कुशल राजनीतिज्ञ तथा विक्टर इमैनुअल को इटली का विधायक कहा जाता है। इन महान् देशभक्तों ने पृथक्-पृथक् साधन अपनाकर इटली के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया और स्वतन्त्र इटली राष्ट्र का निर्माण किया।

इटली का एकीकरण

 इटली के एकीकरण के लिए सोपान :-

इटली के एकीकरण के लिए प्रमुख 2 सोपान हैं-

 प्रथम सोपान –

वियना कांग्रेस के निर्णयों के अनुसार इटली यूरोप की भौगोलिक इकाई मात्र बन गया। इटली के छोटे-छोटे राज्यों की जनता राष्ट्रीय भावनाओं से परिपूर्ण होकर अपनी एकता और स्वतन्त्रता की इच्छुक थी, किन्तु इटली के राज्यों के निरंकुश शासक अपनी सत्ता को त्यागने के लिए तैयार न थे। अत: इटली के  देशभक्तों ने राष्ट्रीय एकीकरण  का आन्दोलन प्रारम्भ किया। कार्बोनरी संस्था के सदस्यों ने इस दिशा में अनेक प्रयल किए, किन्तु 1848 ई० तक उन्हें सफलता न मिल सकी। देशभक्त मेसिनी ने नेपल्स तथा सिसली विद्रोहो को सफल बनाने का यथासम्भव प्रयास किया। किन्तु उसे अपने लक्ष्य में सफलता न मिल सकी ।

द्वितीय सोपान | dusra sopan hindi mai :—

 इस सोपान में गैरीबाल्डी और कावूर ने अथक प्रयत्न किए और इटली के एकीकृत बनाया। कावूर कट्टर देशभक्त था। उसके कार्यों के विषय में ग्राण्ट व टेम्परले ने लिखा है-“उसमे एक कार्य मिशनरियों का विनाश करना भी था । जिस अर्थ में उस समय ‘उदार’ शब्द का प्रयोग होता था, उसी अर्थ में वह उदारवादी था और उसकी उदारवादिता स्वाभाविक थी। परन्तु इटली के एकीकरण ने, सबसे अधिक उसका ध्यान अपनी ओर लगा रखा था। अन्य लोगों से नाति का अन्तर  तापकता में विश्वास करता था और शासन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का उसे वास्तविक ज्ञान था |

> फ्रांसीसी क्रांति के कारण
> यूनानी स्वतंत्रता युद्ध पर नोट

उसने चारों ओर खोज करना आरंभ कर दी और कूटनीति के सभी उपायों को अपनाया। अपनी कार्य-प्रणाली के कारण उसे कटुता तथा शत्रुता का भी सामना करना पड़ा। मेत्सिनी, कावुर की ईमानदारी पर भी सन्देह करता था। और उसको मुक्त कराने वाला मन्त्री कहता था।  जोकि अपने स्वामी को केवल यही परामर्श देता था कि किस प्रकार इटली के एकीकरण को रोका जा सकता है।” लेकिर कावूर ने अपनी योग्यता में सभी कठिनाइयों को सुलझाया। उसने सानिया और पीडमाण्ट  अपने सुधारों से अत्यधिक सम्पन्न और शक्तिशाली बना दिया।

> फ्रांस-प्रशा युद्ध 
> फ्रैंकफर्ट संसद पर नोट 

कावूर ने क्रीमिया के युद्ध में भाग लेकर फ्रांस तथा इंग्लैण्ड की सहानुभूति प्राप्त की और नेपोलियन तृतीय के साथ 20 जुलाई, 1858 ई० को प्लम्बियर्स का समझौता कर लिया। इस समझौते के अनुसार-

  • फ्रांस आस्ट्रिया को लम्बा तथा वेनेशिया से निकालने के लिए सानिया को सैन्य सहायता देगा।
  • सानिया इसके बदले में फ्रांस को नीस और सेवाय के प्रदेश देगा।
  • इटली की सभी जातियों को संयुक्त करके एकीकरण किया जाएगा।
  • रोम के पोप के अधिकार सुरक्षित रहें

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