ज्युसेपे मेत्सिनी कौन था || Giuseppe metasni hindi || Now Gyan

ज्युसेपे मेत्सिनी इटली की एकता का पैगंबर था उसका जन्म 1807 में जेनेवा में हुआ । उसका पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर व उच्च कोटि का विद्वान था। वह फ्रांस की राज्यक्रांति की विशेष जानकारी रखता था। वह अपने पुत्र को फ्रांस की क्रांतिकारियों की गाथा बड़ी रूची के साथ सुनाया करता था ।

इटली के एकीकरण में मेजिनी का योगदान :- 

इन घटाओं से मेसिनी ने बचपन से ही देश भक्ति और स्वतंत्रता की भावना से परिपूर्ण हो गया था। उसने अपने पिता से बचपन में ही फ्रांस की राज्यक्रांति की घटनाओं ,फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना ,नेपोलियन बोनापार्ट की विजयों , का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया था । उसे अपने देश के अतीत गौरव का विज्ञान हो चुका था । वह अपने देश की और जनता की सोचनीय  दशा को देखकर दुखी रहता था । वह इटली की पराधीनता  को स्वतंत्रता मे बदलने का इच्छुक था । 

ज्युसेपे मेत्सिनी
ज्युसेपे मेत्सिनी | Giuseppe Mazzini in hindi

ज्युसेपे मेत्सिनी की  शिक्षा :- 

 शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत उसने एक साहित्यकार बनने का निश्चय किया। किंतु बाद में  देश भक्ति की भावना से प्रेरित होकर वह कार्बोनरी का एक सक्रिय सदस्य बन गया । कार्बोनरी के सदस्य के रूप में उसने इटली के एकीकरण के लिए प्रयत्न करना आरंभ कर दिया । लेकिन 1820 से 1821 ईस्वी के विद्रोह के असफलता को देख कर वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा की संस्थाओं द्वारा इटली का एकीकरण होना असंभव है। 

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अतः उसने इटली में राष्ट्रीय और उदारवादी विचारों का प्रसार करना आरंभ कर दिया। 1830 ईसवी  की क्रांति में उसने महत्वपूर्ण रूप में भाग लिया। फलतः  उसे पीडमांड के अन्य क्रांतिकारियों के  साथ सेवाना दुर्ग में कैद कर दिया गया । 6 महीने तक उसे जेल में डाल दिया गया। जेल में रहकर उसने इटली के एकीकरण की अनेक योजनाएं बनाई और यह निष्कर्ष निकाला कि जब तक इटली के नवयुवकों में देशभक्ति त्याग बलिदान सहनशीलता उत्पन्न नहीं की जाएगी तब तक इटली का एकीकरण संभव नहीं है।

यंग इटली की स्थापना :- 

मेत्सिनी  को 6 महीने की कैद के बाद देश से निर्वासित  कर दिया गया । 1832 ईसवी में उसने फ्रांस के मासिलेज  नगर में यंग इटली नामक संस्था की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य गणतंत्र तथा राष्ट्रीय आदर्शओं  का प्रचार करना था।  इस संस्था में मेत्सिनी ने इटली के वीर साहसी चरित्रवान तथा सैनिक कार्यों  नवयुवकों को भर्ती किया। इस संस्था में 40 वर्ष तक की आयु वाले व्यक्ति सदस्य बन सकते थे और सदस्यता ग्रहण करते समय उन्हें जो शपथ लेनी पड़ती थी।। ” मैं इटली को स्वतंत्र करवाने और इसमें गणतंत्र की स्थापना करने के लिए अकेले अपना सब कुछ न्योछावर कर दूंगा

 ज्युसेपे मेत्सिनी द्वारा अन्य संस्थाएं :-

 उसने अपने क्रांतिकारी सिद्धांतों को इतनी तेजी के साथ फैलाया कि वह इटली का सर्व प्रमुख नेता और सच्चा देशभक्त माना जाने लगा । उसकी आदर्शों से प्रेरणा लेकर यूरोप की विभिन्न देशों ने अपने यहां यंग इंग्लैंड व यंग आयरलैंड आदि संस्थाओं स्थापित की और अपनी स्वाधीनता के लिए प्रयत्नशील हो गई । 1848 इसवी की फ्रांसीसी क्रांति की सफलता और न घोर प्रतिक्रियावादी मेटरनिख ने पतन की सूचना पाकर इटली के एकीकरण बड़े उत्साहित हुए।

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उन्होंने लंबाडी की राजधानी मिलन में विद्रोह कर दिया और ऑस्ट्रिया की सेना को वहां से भगा दिया । उसने क्रांतिकारियों का साथ दिया इसी समय पोप के  राज्य में भी विद्रोह हो गया । जिसने खुद को अपने प्राणों की रक्षा के लिए भाग जाना पड़ा। देश भक्तों ने रोम  में गणतंत्र की स्थापना की तब वह वहां का राष्ट्रपति बना और गौरीबाडी उसका  सहायक बना  लेकिन कुछ समय बाद फ्रांस की सम्राट नेपोलियन तृतीय ने एक विशाल सेना बीच का रोम मे  गणतंत्र का अंत कर दिया ।और पोप को पुनः रोम  का राजा बना दिया । 

ज्युसेपे मेत्सिनी पर नोट | note on Giuseppe metasni hindi

मेत्सिनी का मूल्यांकन | thioughts of Giuseppe metasni  :- 

 इटली के स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में  मेत्सिनी का महत्वपूर्ण स्थान है। एक आदर्शवादी और क्रांतिकारी विचार अच्छा वह कट्टर देशभक्त और सच्चा गणतंत्र वादी था। उसने इटली के एकीकरण के लिए हर संभव प्रयत्न किया ।  

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