फ्रांसीसी क्रांति

फ्रांसीसी क्रांति- परिणाम,कारण तथा नोट्स || france ki kranti hindi mai || now gyan

फ्रांसीसी क्रांति विश्व की एक सबसे महत्वपूर्ण घटना थी। जिसने फ्रांस की राजनीतिक तथा सामाजिक स्थिति में अमूल परिवर्तन ला दिए।

  • फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत 1789 में हुई तथा फ्रांसीसी साम्राज्य के विस्तार के बाद 1799 तक चली।
  • फ्रांसीसी क्रांति का दौर खूनी संघर्ष का दौर था तथा अंततः एक गणतंत्र गणराज्य की स्थापना की गई।

इस क्रांति ने फ्रांस को ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया तथा इस क्रांति को विश्व के इतिहास में मील का पत्थर भी कहा जाता है।

फ्रांसीसी क्रांति के कारण :-

फ्रांसीसी क्रांति का कोई एक प्रमुख कारण नहीं है, फ्रांस की राजनीतिक परिस्थितियों तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण ही फ्रांसीसी क्रांति का उदय हुआ।

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  फ्रांस की राजनीतिक परिस्थितियां :-

फ्रांसीसी क्रांति के उदय का एक प्रमुख कारण फ्रांस की राजनीतिक परिस्थितियां थी –

  • फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र था तथा राजा के पास असीमित अधिकार थे।
  • लुई 14वें ने कहा -“मैं ही राज्य हूं” तथा वह अपने अनुसार नियम कानून बनाता था।
  • फ्रांस के राजा ने शक्ति का संपूर्ण केंद्रीकरण राजतंत्र के पक्ष में कर दिया था।
  • फ्रांस की संपूर्ण शासन व्यवस्था नौकरशाही पर आधारित थी, जो कि वंशानुगत चलती थी
  • क्रांति के समय फ्रांस की शासन व्यवस्था पूर्णता भ्रष्ट, निष्क्रिय,निरंकुशता तथा शोषण करने वाली थी।

फ्रांस की सामाजिक परिस्थितियां :-

फ्रांसीसी क्रांति का एक प्रमुख कारण फ्रांस की सामाजिक स्थिति भी थी। फ्रांस का समाज पूर्णता विघटित था। इसे तीन भागों में बांटा गया था-

 (•) प्रथम वर्ग / पादरी वर्ग :

प्रथम वर्ग के अंदर चर्च तथा पादरी समाज के लोग आते थे। इनका जीवन शान शौकत तथा विलासिता पूर्ण होता था। यह भी उच्च तथा निम्न वर्गों में विभाजित किए गए थे।

(•) द्वितीय वर्ग / कुलीन वर्ग :

द्वितीय वर्ग के अंतर्गत सरकारी विभाग में कार्यरत लोग होते थे। यह किसानों से कर वसूलते थे तथा उनका शोषण करते थे।

(•) तृतीय वर्ग —  जन साधारण :

तृतीय वर्ग के अंतर्गत सामान्य जनता आती थी। जिनके पास कोई विशेष अधिकार नहीं था। इनमें मजदूर वर्ग, किसान वर्ग, मध्य वर्ग के लोग तथा बुद्धिजीवी शामिल थे तथा इस वर्ग में भारी असमानताएं थी।

फ्रांसीसी क्रांति के लिए  आर्थिक कारण :-

फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत के लिए आर्थिक परिस्थितियों ने अहम भूमिका निभाई। आर्थिक असंतोष के कारण फ्रांस ऋण के बोझ तले दबा रहा।

  • फ्रांस की राजाओं की फिजूलखर्ची के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति संकटग्रस्त हो गई।
  • आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कर में वृद्धि होने लगी तथा किसान वर्ग कर देने में असमर्थ हो गए।
  • लुई 16 अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध में भाग लेकर फ्रांस की आर्थिक स्थिति को और देयनीय बना दिया।

फ्रांसीसी क्रांति के लिए तात्कालिक कारण  :-

इस क्रांति का प्रमुख कारण फ्रांस की तात्कालिक परिस्थितियोंभी थी। लुइ 16वें के आते-आते फ्रांस की आर्थिक स्थिति दयनीय होती चली गई। तब एस्टेट जनरल की बैठक बुलाई गई तथा उसमें विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग पर भी कर लगाने की बात की गई लेकिन प्रथम व द्वितीय वर्ग के लोगों ने इसका विरोध किया। 

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फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम  :-

फ्रांस की क्रांति विश्व की एक महत्वपूर्ण घटना थी । इसकी बड़ी दूरगामी परिणाम गई जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं :

  1.  इस क्रांति ने सदियों से चली आ रही यूरोप की पुरातन व्यवस्था का अंत कर दिया।
  2. इस क्रांति की महत्वपूर्ण देन मध्यकालीन समाज की सामंती व्यवस्था का अंत करना है।
  3. फ्रांस के क्रांतिकारियों द्वारा की गई मानव अधिकारों की घोषणा, मानव जाति की स्वाधीनता के लिए बड़ी महत्वपूर्ण है।
  4. इस क्रांति ने समझते यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का विकास और प्रसार किया। परिणाम स्वरूप यूरोप के अन्य देशों में क्रांतियों का सूत्रपात हुआ।
  5.  फ्रांस की क्रांति में धर्मनिरपेक्ष राज्य की अवधारणा को जन्म दिया।
  6. इस क्रांति ने लोकप्रिय संप्रभुता के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  7. फ्रांसीसी क्रांति ने मानव जाति को स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व का नारा प्रदान किया।
  8. इस क्रांति ने इंग्लैंड, आयरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों की विदेश नीति को प्रभावित किया।
  9. कुछ विद्वानों के अनुसार फ्रांस की क्रांति समाजवादी विचारधारा का स्रोत थी, क्योंकि इसने समानता का सिद्धांत प्रतिपादित कर समाजवादी व्यवस्था का मार्ग भी खोल दिया था।
  10. इस क्रांति के फलस्वरुप फ्रांस ने कृषि उद्योग, कला साहित्य, शिक्षा तथा नैतिक गौरव के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति की।
फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत कब हुई?

फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत 1789 ईस्वी में हुई तथा नेपोलियन ने फ्रांसीसी साम्राज्य के विस्तार किया और यह क्रांति 1799 तक चली ।

फ्रांसीसी क्रांति का नारा क्या था?

फ्रांसीसी क्रांति का नारा “स्वतंत्रता,समानता और बंधुत्व” था। यह नारा फ्रांस में ही नहीं अपितु संपूर्ण यूरोप में प्रख्यात हुआ।

1789 में फ्रांस का राजा कौन था?

1789 में फ्रांस का राजा लुई 14वाँ था। जो बड़ा ही निरंकुश तथा  राजतंत्रवादी था।

फ्रांसीसी क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या था?

फ्रांसीसी क्रांति का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता समानता तथा बंधुत्व की भावना का प्रसार करना था।

1789 की फ्रांसीसी क्रांति का यूरोप पर क्या प्रभाव पड़ा?

1789 की फ्रांसीसी क्रांति केवल फ्रांस तक ही नहीं अपितु पूरे यूरोप में फैल गई और उसने संपूर्ण यूरोप में समानता स्वतंत्रता तथा  बंधुत्व की भावना का प्रसार किया और यूरोप में स्वतंत्रता के लिए क्रांति प्रारंभ हो गई।

फ्रांसीसी क्रांति का भारत पर क्या असर पड़ा?

फ्रांसीसी क्रांति का भारत पर बहुत गहरा असर पड़ा क्योंकि भारत में सामाजिक तथा आर्थिक स्तर पर समानताएं थी, और अंग्रेजों के गुलाम होने के कारण यहां का मजदूर वर्ग और निम्न वर्ग कर्ज के बोझ तले दबा था। हो सकता है , फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम स्वरूप ही भारत में स्वतंत्रता संग्राम प्रारंभ हो गया।

फ्रांसीसी क्रांति दुनिया के लिए कौन सी विरासत छोड़ गई?

दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति बहुत ही अमूल्य विरासत छोड़ गई। फ्रांसीसी क्रांति ने दुनिया में स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व जैसी भावनाओं का संचार कर दिया।

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