फ्रैंकफर्ट संसद | Frankfurt parliament in hindi class 10 | now gyan

फ्रैंकफर्ट संसद पर नोट class 10 || Frankfurt parliament in hindi :

फ्रांस की 1848 ई० की क्रान्ति  का जर्मनी पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इस समय जर्मन  देशभक्तों ने अपने दो उद्देश्य निश्चित कर लिए थे

प्रथम उद्देश्य –

जर्मन राज्यों में निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी शासन का अन्त  करके लोकतन्त्र शासन की स्थापना करना ।

द्वितीय उद्देश्य­ –

जर्मनी के विभिन्न राज्यों का संगठन करके जर्मनी का पूर्ण एकीकरण करना।

       इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जर्मनी के देशभक्तों ने मैटरनिख के पतन का समाचार सुनकर स्थान-स्थान पर क्रान्तिकारी गतिविधियाँ प्रारम्भ कर दीं। प्रशा के सम्राट ­डिक विलियम  ने अपने राज्य में, उदारवादी संविधान लागू करके यह घोषणा की कि वह जर्मनी के एकीकरण के लिए पूर्ण प्रयत्न करेगा। इस घोषणा से प्रभावित होकर अन्य राज्यों के क्रान्तिकारियों ने अपने राजाओं के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखीं –

क्रांतिकारियों की माँगें :-

  • संवैधानिक सरकार की स्थापना की जाए।
  • प्रेस तथा विचार अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता दी जाए।
  • जर्मन राज्य संघ के लिए एक शक्तिशाली संघात्मक संविधान बनाया जाए। 
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फ्रैंकफर्ट राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन :-

जर्मनी के सभी राजाओं ने क्रान्तिकारियों की उक्त सभी माँगे स्वीकार कर ली। तत्पश्चात् जर्मनी के देशभक्तों ने 1848 ई० में फ्रैंकफर्ट नामक स्थान  पर एक राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन बुलाया। इस अधिवेशन में जर्मनी के सभी राज्यों से निर्वाचित 568 प्रतिनिधियों  ने भाग लिया।

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फ्रैंकफर्ट राष्ट्रीय सभा का उद्देश्य :-

इस  सभा का उद्देश्य सम्पूर्ण जर्मनी के लिए एक उदारवादी संविधान का निर्माण करना था। लेकिन यह सभा अपना कार्य सुचारु रूप से करने में असफल रही, क्योंकि इन्होंने काफी समय मौलिक अधिकारों पर बहस करने में ही नष्ट कर दिया। अन्त में एक वर्ष पश्चात राष्ट्रीय सभा ने एक संविधान बनाया, जिसके अनुसार दो सदनों वाली एक व्यवस्थापिका निर्मित की गई।

कार्यपालिका का प्रमुख प्रशा का सम्राट बनाया गया, जिसका पद वंशानुगत रखा गया। लेकिन जब सभी ने प्रशा के सम्राट को जर्मनी का राजमुकुट ग्रहण करने के लिए आमन्त्रित किया तो उसने आस्ट्रिया के भय  से जर्मनी का राजमुकुट  स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

जर्मनी का राजमुकुट ग्रहण करने के कारण :-

1849 ई० को  प्रशा के सम्राट की अस्वीकृति ने जर्मनी के देशभक्तों की आशाओं पर पानी फेर दिया। लेकिन प्रशा के सम्राट ने निम्नलिखित कारणों से जर्मनी का राजमुकुट ग्रहण करना ठीक न समझा – 

  • प्रशा के सम्राट ­फ्रेड्रिक विलियम  का विचार था: कि जब वह जर्मनी का सम्राट बन जाएगा तो आस्ट्रिया से उसकी शत्रुता हो जाएगी, जिससे उसके साथ युद्ध करना अनिवार्य हो जाएगा।  
  • प्रशा के सम्राट को जर्मनी का राजमुकुट जर्मन जनता द्वारा मिल रहा था।
  • वह इसे क्रान्तिकारी भावनाओं से युक्त समझता था।
  • राष्ट्रीय सभा ने जर्मनी के लिए 1849 ई० का जो संविधान बनाया था।
  • उसमें राजा के अधिकारों को काफी सीमित रखा गया।
  • प्रशा के सम्राट ने जर्मनी के राजमुकुट को ठुकरा दिया।

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