भारत की आजादी का इतिहास

भारत की आजादी का इतिहास || History of India’s Independence || now gyan

भारत को प्राचीन समय से ही अनेक नामों के नाम से जाना जाता है। जैसे कि सोने की चिड़िया, हिंदुस्तान आदि। आजादी से पूर्व भारत तथा पाकिस्तान एक ही देश थे। लेकिन आजादी के बाद भारत का विभाजन हो गया। जिससे भारत और पाकिस्तान बन गये। भारत को भारत माता के नाम से जाना जाता है। भारत  में अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया जिन्होंने भारत को विश्वगुरु के नाम से विश्व में प्रसिद्ध कराया। भारत ब्रिटिश सरकार के अधीन कई सालों तक रहा। जिसके बाद भारत को आजादी मिली भारत की आजादी का इतिहास निम्न  है- 

flag of india

1857 की क्रांति :-

 हमारे देश को आजाद कराने के लिए 1857 ईसवी में सबसे पहला  विद्रोह हुआ। जिस  विद्रोह में मंगल पांडे एवं अनेक क्रांतिकारियों ने अपनी अहम भूमिका निभाई।  भारत की आजादी  के लिए लड़ाई लड़ी। वैसे तो हमारा देश भारत 1857 में ही आजाद हो जाता है। लेकिन 1857 की क्रांति अन्य जगह पर अलग-अलग स्थानों पर अलग अलग समय पर हुई। जिस कारण हमारा देश आजाद नहीं हो पाया और हमें अंग्रेजी सरकार की ही बातें मानी पड़ी।

महात्मा गांधी जी का जन्मं :-

गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में  हुआ। तथा बड़े होकर उन्होंने भारत की आजादी के लिए अनेक प्रकार के आंदोलन चलाए तथा कई आंदोलन सफल भी रहे। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। तथा उन्होंने अंत तक भारत को आजाद करने के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कार्य किया। 

महात्मा गांधी

सत्याग्रह का विचार :- 

गांधी जी ने सत्याग्रह पर जोर देते हुए कहा कि सत्याग्रह के विचार  में सत्य की शक्ति पर आग्रह और सत्य की खोज पर जोर दिया जाए। यदि आपका उद्देश्य सच्चा है और आप का संघर्ष अन्याय के विरुद्ध है। तो आप की जीत अवश्य होगी। यही विचार सत्याग्रह कहलाया। उन्होंने कहा कि हम अहिंसा के द्वारा किसी को भी नहीं तोड़ सकते हैं ।  

जलियांवाला बाग हत्याकांड :- 

जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में घटित हुआ।इसमें जलियांवाला बाग  में एक सभा चल रही थी। तभी जनरल डायर  अपने सैनिकों के साथ आया और उन्हें गोली चलाने का आदेश दे दिया इस घटना में हजारों लोगों की मृत्यु हो गई और कई लोग घायल हो गए। इससे पूरे देश में ब्रिटिश सरकार के प्रति आक्रोश उत्पन्न हो गया। और गांधी जी को इस घटना से बहुत ज्यादा पीड़ा पहुंची। 

भारत में असहयोग आंदोलन
भारत में असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन | Non-cooperation movement in hindi –

महात्मा गांधी ने एक सहयोगी के रूप में भारतीय राजनीति में प्रवेश किया । लेकिन बाद में कतिपय घटनाओं ने उन्हें असहयोगी बना दिया। जिस कारण उन्होंने असहयोग आंदोलन शुरू किया। जिसमें उन्होंने कहा कि अब हम ब्रिटिश सरकार का साथ नहीं देंगे ।असहयोग आंदोलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं–   

  • प्रथम विश्वयुद्ध के परिणाम ।   
  • आर्थिक असंतोष।     
  • महामारी का प्रकोप ।    
  • अकाल पडना ।    
  • सरकार का दमन चक्र।    
  • रौलट एक्ट  ।    
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड। 

सविनय अवज्ञा आंदोलन | Civil disobedience in hindi  | savinay aavgya aandolan –

26 जनवरी 1930 को पूर्ण क्षमता प्राप्त की घोषणा से भारतीयों में उत्साह की एक नई लहर उत्पन्न हो गई। 14 फरवरी 1930 ईस्वी को साबरमती में कांग्रेस की कार्यकारिणी ने महात्मा गांधी को सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने का अधिकार प्रदान किया।

   सविनय अवज्ञा आंदोलन की शर्तें :-

  1. मद्यपान का निषेध किया जाए ।  
  2. रुपए व उनके अनुपातिक मूल्य में कमी  ।   
  3. भूमि कर हटा दिया जाए।    
  4. नमक कर हटा दिया जाए।    
  5. सैनिक वय्य कम किया जाए     
  6. विदेशी वस्तुओं पर आयात कर लागू किया जाए ।  
  7. राजनीतिक बंदियों को मुक्त कर दिया जाए।
भारत
भारत का आधुनिक इतिहास

 चोरा-चोरी की घटना | Chauri Chaura incident | chauri chura ki ghatna :

जिस समय गांधी जी असहयोग आंदोलन चला रहे थे । उस समय पुलिस द्वारा दमन करने के फल स्वरुप, एक उत्तेजित भीड़ ने गोरखपुर के चोरा चोरी नामक स्थान पर, 5 फरवरी 1922 ईस्वी को 21 सिपाहियों एवं एक दरोगा को थाने में बंद कर आग लगा दी। वह सब जलकर मर गए गांधी जी को इस बात से बहुत पीड़ा पहुंची व  उन्होंने असहयोग आंदोलन बंद कर दिया ।   

गांधी इरविन समझौता | Gandhi–Irwin Pact in indian history  :-  

सविनय अवज्ञा आंदोलन की परिपेक्ष में 5 मार्च 1931 ईस्वी को गांधी इरविन समझौता हुआ। उस समय भारत के वायसराय इरविन  थे। जिस कारण इसका नाम गांधी इरविन समझौता रखा गया ।

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