दक्षिण भारत का इतिहास

दक्षिण भारत का इतिहास || History of South India In Hindi || Now Gyan

दक्षिण भारत का इतिहास 4 हजार वर्षों से अधिक पुराना है। इन 4 हजार वर्षों में दक्षिण भारत में कई राजवंश आए तथा दक्षिण भारत पर राज किया। अंत में इन सभी राजवंशों का पतन भी हो गया। दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख राजवंश निम्न है:

  • सातवाहन वंश [ Satavahana dynasty ]
  • चोल वंश [ Chola dynasty ]
  • चेर वंश [ Chera dynasty ]
  • पांडे वंश [ Pandey dynasty ]
  • चालुक्य वंश [ Chalukya dynasty ]
  • पल्लव वंश [ Pallava dynasty ]

दक्षिण भारत 5 राज्यों तथा 3 केंद्रशासित प्रदेशों से मिलकर बना है। भारत के 19% क्षेत्र को दक्षिण भारत द्वारा घेरा गया है। दक्षिण भारत की प्रमुख भाषाएं तेलुगू, तमिल, कन्नड़, आदि हैं।

दक्षिण भारत का इतिहास
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दक्षिण भारत में सातवाहन वंश || Satavahana dynasty in Hindi :-

मौर्य वंश के पतन के बाद भारत में सातवाहन वंश का उदय हुआ। सातवाहन वंश ने दक्षिण भारत में अपना साम्राज्य स्थापित किया। इस वंश का सर्वोच्च शासक सबसे अच्छे वंश का दावा करता है। एक तरफ वह स्वयं को ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति मानता है तथा दूसरी तरह वह खुद को क्षत्रियों का नाश करने वाला बताता है।

  • भारत में सर्वप्रथम शीशे के सिक्के सातवाहन वंश के द्वारा ही चलाए गए थे।
  • सातवाहन वंश ने शीशे के सिक्के रोम से मंगाए थे।

दक्षिण भारत में चेर वंश || Chera dynasty In Hindi :-

चेर दक्षिण भारत का एक राजवंश था। चेर वंश का विस्तार आधुनिक कोयंबटूर, सलीम तथा मध्य केरल के क्षेत्रों के पास तक माना जाता है। इसके पड़ोसी शासक चोल तथा पाण्डय थे। चेर वंश को केरल पुत्र के नाम से भी जाना जाता है।

दक्षिण भारत में चोल वंश || Chola dynasty In Hindi :-

चोल प्राचीन भारत का एक प्रमुख राजवंश है। जिसकी जानकारी संगम युग अर्थात 9वीं शताब्दी से मिलती है।

  • चोल वंश का संस्थापक विजयालय को माना जाता है।
  • चोल वंश ने 9वीं – 12वीं शताब्दी तक एक अत्यंत शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य की स्थापना की।
  • तंजावुर को जीतने के लिए विजयालय ने नरकेसरी की उपाधि धारण की।
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दक्षिण भारत में पाण्डय राजवंश || Pandey dynasty In Hindi :-

पाण्डय राजवंश भी प्राचीन भारत का एक प्रमुख राजवंश था। इसका कुछ विवरण संगम युग अर्थात नवी शताब्दी से मिलता है। लेकिन पांडे वंश का संपूर्ण और क्रमागत इतिहास नहीं मिलता है।

दक्षिण भारत का चालुक्य वंश || Chalukya Dynasty hindi mai :-

चालुक्य प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश था. चालुक्य वंश की राजधानी बादागी थी। अपने महत्तम विस्तार के समय यह वर्तमान के संपूर्ण कर्नाटक, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी मध्यप्रदेश तथा दक्षिण क्षेत्रों तक अपना विस्तार कर लिया था।

दक्षिण भारत में पल्लव वंश || Pallava dynasty In Hindi :-

प्राचीन भारत के दक्षिणी क्षेत्र में पल्लव वंश भी अपना एक महत्वपूर्ण योगदान रखता है. पल्लव वंश भी दक्षिण भारत का एक प्रमुख राजवंश था। चौथी शताब्दी में इन्होंने कांचीपुरम में अपना राज्य स्थापित किया और लगभग 600 वर्षों तक तमिल तथा तेलुगू क्षेत्रो में अपना शासन चलाया।

  • पल्लव वंश के राजा अपने को छत्रिय मानते थे।
  • पल्लव वंश ने ही ध्यान योग को चीन में फैलाया

विजयनगर साम्राज्य || Vijayanagara Empire hindi mai :-

विजयनगर साम्राज्य मध्यकाल का एक प्रमुख साम्राज्य था। जिसने 1336 से लेकर 1646 अर्थात 310 वर्षों तक अपना शासन किया। विजयनगर साम्राज्य का वास्तविक नाम कर्नाटक साम्राज्य था।

दक्षिण भारत की संस्कृति || South Indian Culutre in hindi –

दक्षिण भारत की संस्कृति, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के समान ही है। क्योंकि दक्षिण भारत के कई वंशो ने दक्षिण व दक्षिणावर्ती एशिया पर शासन किया।

दक्षिण भारत के लोगों का प्रमुख व्यवसाय :-

प्राचीन समय में दक्षिण भारत के लोगों का प्रमुख व्यवसाय शिल्प उद्योगकृषि था। व्यापार तथा वाणिज्य में प्रगति के साथ उनकी आय के स्रोत भी बढ़ते चले गए और व्यवसाय में अपार वृद्धि हो गई। विभिन्न स्रोतों से पता चलता है कि दक्षिण भारत में आंतरिक तथा बाह्य दोनों ही व्यापार अच्छे चल रहे हैं अर्थात व्यापार प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है।

इतिहास विदों का मत है कि प्राचीन समय में यातायात के साधनों की कमी थी और सड़कों की स्थिति ठीक नहीं थी। दक्षिण भारत के लोग कृषि तथा शिल्प उद्योग पर ही निर्भर थे। और उनकी आजीविका कृषि पर ही आधारित थी।

दक्षिण-भारत-का-खानपान

दक्षिण भारत का खानपान || south india food in hindi :-

दक्षिण भारत का खानपान बहुत ही विशिष्ट होता है। यहां पर बहुत सारे बिन जनों का सेवन किया जाता है। दक्षिण भारत के लोग खाने में चावल व सूप को सर्वाधिक पसंद करते हैं। यह सूप जीरा, काली मिर्च और धनिया से तैयार किया जाता है। इसमें तले हुए मसालेदार आलू भी मिलाए जाते हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्न || important question :-

दक्षिण भारत की उन्नति में मंदिरों की क्या भूमिका थी?

दक्षिण भारत की उन्नति में मंदिरों की अपनी एक अहम भूमिका रही है। मंदिर न केवल बुद्धि को प्रकट करते हैं। बल्कि समृद्ध परंपरा और संस्कृति को भी प्रदर्शित करते हैं। तथा दक्षिण भारत के मंदिर वहां की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को भी मजबूत बनाते हैं।

दक्षिण भारत की सबसे प्रमुख फसल कौन सी है?

दक्षिण भारत में गन्ने का उत्पादन किया जाता है। क्योंकि वहां की जलवायु गन्ने के उत्पादन के लिए प्रयुक्त है इसलिए दक्षिण भारत में गन्ना अधिक रस वाला होता है।

दक्षिण पथ क्या था?

दक्षिण पथ का अर्थ होता है कि दक्षिण दिशा की ओर चलने वाला पथ

दक्षिण भारत के धर्म के विषय में आप क्या जानते हैं?

बौद्धकाल तथा गुप्तकाल को भारत का स्वर्ण काल कहा जाता है। यहूदी धर्म के लोगो ने लगभग 973 ईसवी पूर्व में यहूदियों ने केरल के मालाबार तट पर प्रवेश किया।

दक्षिण भारत क्यों प्रसिद्ध है?

दक्षिण भारत विभिन्न कारणों से प्रसिद्ध है जिनमें से कुछ निम्न है :
1 -दक्षिण भारत अपनी दस्तकारी के लिए प्रसिद्ध है।
2 – दक्षिण भारत में समुद्री व्यापार बहुत ही वृहद्ध मात्रा में होता है।

दक्षिण भारत के मंदिर को मुख्य द्वार क्यों कहते हैं?

दक्षिण भारत के मंदिरों को निम्नलिखित कारणों से मुख्य द्वार कहा जाता है:
1 – दक्षिण भारतीय वास्तुकला की अभिलाक्षणिक विशेषता है।
2 – गोपुरम समय के साथ विकास की ओर बढ़ा और दक्षिण भारत के बाद मंदिरों का केंद्र बन गया।

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