भारत का मध्यकालीन इतिहास

भारत का मध्यकालीन इतिहास || Medieval History of India in Hindi || Now Gyan

भारत का मध्यकालीन इतिहास का दौर 8 वीं सदी से लेकर 12 वीं सदी तक माना जाता है। इस काल में पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकुट से लेकर शक्तिशाली दिल्ली सल्तनत का उदय हुआ।

भारतीय इतिहास के मध्य काल में भारत की स्थिति :-

प्राचीन भारत की स्थिति तथा मध्यकालीन भारत की स्थिति में बहुत से महत्वपूर्ण परिवर्तन आए। जो आर्थिक सामाजिक तथा राजनीतिक स्तर पर देखे गए।

मध्यकालीन इतिहास में सामाजिक स्थिति :-

भारत में मुस्लिम सत्ता स्थापित हो गई। मुस्लिम व्यापारियों तथा सौदागरों के मध्य गतिविधियाँ तेज हो गई। जिसके कारण बड़े भूस्वामी आर्थिक स्रोतों का केंद्र बन गई। समाज में भू संपन्न कुलीन वर्ग का आविर्भाव हुआ। 

मध्यकालीन इतिहास में आर्थिक स्थिति:-

इस काल में सिक्कों का प्रचलन पुनः प्रारंभ हो गया। जिसके फलस्वरूप उत्तरी भारत में व्यापार वाणिज्य की प्रगति हुई। 12 वीं सदी तक आते-आते देश आर्थिक दृष्टि से पुनः और सुदृढ़ हो गया।

मध्यकालीन इतिहास में राजनीतिक स्थिति:-

भारत का मध्यकालीन इतिहास आने वाले समय पर आधारित था। जो कि इस्लामिक प्रभाव व भारत पर शासन के साथ सशक्त रूप से संबंध रखता था।  मध्यकालीन भारतीय इतिहास तथाकथित स्वदेशी शासकों के अधीन लगभग 3 शताब्दी तक चलता रहा।  जिसमें चालुक्य, पल्लव, पांडेयराष्ट्रकूट शामिल थे।

वंशों का भारत में आगमन  :-

भारत में आने वाला एक वंश मुगल था। मुगल साम्राज्य 1526 ईस्वी से प्रारंभ हुआ तथा 19वीं शताब्दी तक मुगल शासन चला। अधिकतर मुगल शासक तुर्क और सुन्नी मुसलमान थे। मुगल शासन की शुरुआत 17 वीं शताब्दी से हुई। कुछ प्रमुख राजवंश निम्नलिखित हैं :

गुलाम वंश || Gulam vansh :

 गुलाम वंश भारत में आया एक राजवंश था। जिसका शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था। जिसने भारत में आकर गुलाम वंश की स्थापना की तथा भारत में गुलाम वंश को आगे बढ़ाया उन्होंने भारत पर 84 वर्षों तक  राज किया। और भारत में मुस्लिम शासन की नींव रखी।

तुगलक वंश || tuglak vansh :

तुगलक वंश फारसी दिल्ली सल्तनत का एक राजवंश था।  जिसने 1320 से लेकर सन् 1414 तक अर्थात 94 वर्षों तक दिल्ली की सत्ता पर राज किया। गयासुद्दीन तुगलक का पुत्र मोहम्मद बिन तुगलक था। उसका उत्तराधिकारी फिरोजशाह तुगलक था। जिसने अपने पिता की मृत्यु के बाद भारत पर शासन किया।

खिलजी वंश || khiljai vansh :

खिलजी वंश भी भारत में आया एक राजवंश था। जिसने 30 वर्षों तक अर्थात 1290 से 1320 तक भारत पर राज किय व दिल्ली की सत्ता को चलाया। यह राजवंश तुर्कीस्तान का था। वंश के शासक अपनी निर्दयता और क्रूरता  के लिए संपूर्ण भारत में जाने जाते थे।

भारत का मध्यकालीन इतिहास
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मध्यकालीन इतिहास का वर्गीकरण || madhyakalin itihas ka vargikaran :-

जिस प्रकार से इतिहास का वर्गीकरण किया गया है।  ठीक उसी प्रकार से भारतीय मध्यकालीन इतिहास का भी वर्गीकरण किया गया है। इसका वर्गीकरण मुख्य दो आधार पर किया गया है मध्यकालीन इतिहास को 2 अवधियों में विभाजित किया जा सकता है :-

प्रारंभिक मध्ययुगीन काल6 वीं से लेकर 13 वीं शताब्दी तक
गत मध्यकालीन काल13 वीं से लेकर 16 वीं शताब्दी तक
मध्यकालीन-इतिहास-वर्गीकरण

   इस प्रकार से भारत के मध्यकालीन इतिहास को प्रारंभिक मध्यकालीन इतिहास तथा गत मध्यकालीन इतिहास में बांटा गया है।

भारत के प्रमुख मध्यकालीन शहर || madhyakalin sahr :-

अक्सर भारत के मध्यकालीन इतिहास से संबंधित जो प्रश्न पूछा जाता है, कि भारत के प्रमुख मध्यकालीन शहर कौन-कौन से हैं? वैसे तो भारत के मध्यकाल में प्रमुख शहर बहुत से हैं। लेकिन ऐसे चार प्रमुख शहर हैं। जिनका नाम विदेशी शासकों के नाम पर रखा गया है :

  1. तुगलकाबाद [ tughlakabad ]
  2. जहांपनाह [ Jahanpanah ]
  3. फिरोजाबाद [ Firozabad ]
  4. शाहजहाँबाद [ shahjahanabad ]

मध्यकालीन इतिहास में भाषा और साहित्य :-

भारत के मध्यकालीन इतिहास में भी भाषा और साहित्य ने अपना एक प्रमुख स्थान बनाए रखा था। अगर बात इस विषय की करें, तो इस पर यह प्रश्न पूछा जाता है। कि मध्यकालीन काव्य की प्रमुख भाषा कौन सी थी? तो मध्यकालीन काव्य की प्रमुख भाषा हिंदी तथा उर्दू थी।  क्योंकि इस समय उर्दू भाषा का विकास बहुत तेजी से हुआ। 

मध्यकालीन भारत का इतिहास  books :-

अगर हमें संपूर्ण भारत की मध्यकालीन इतिहास को समझना है। इसका सबसे अच्छा साधन मध्यकालीन भारत का इतिहास books या भारत के मध्यकाल पर लिखी गई किताबें हैं। कुछ बहुत विशेष व रोचक किताबों की सूची निम्न वत है :-

  1. मध्यकालीन भारत राजनीती, समाज और संस्कर [ Madhyakaleen Bharat Rajniti, Samaj Aur Sanskr ]
  2. मध्यकालीन भारत [ Madhyakaleen Bharat ] – सतीश चंद्र 1990
  3. भारत में मुगल [ Mughals in India ]
  4. मध्यकालीन भारत का इतिहास – सतीश चंद्र
> दक्षिण भारत का इतिहास
> भारत में धर्म व साम्राज्य
> वैदिक सभ्यता

मध्यकालीन भारतीय इतिहास की विशेषताएं:-

भारत के मध्यकालीन इतिहास की विशेषताओं को जाने के लिए, भारत के प्राचीन इतिहास से हमें इसकी तुलना करनी पड़ेगी। मध्यकालीन इतिहास की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं :-

  • आधुनिक इतिहास के संदर्भ में मध्यकालीन इतिहास में मानव जाति ने राज्य तथा सल्तनतो का निर्माण करना प्रारंभ किया।
  • भारत पर बहुत से विदेशी अक्रांताओं ने शासन किया।
  • भारत की मध्यकालीन इतिहास में बहुत से इस्लामिक राष्ट्रों ने भारत आने का मार्ग खोजा
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भारतीय मध्यकालीन इतिहास के स्रोत:-

भारतीय मध्यकालीन इतिहास के प्रमुख स्रोत कुछ ग्रंथ तथा कुछ किताबें हैं। मध्यकाल में बने किलो तथा भवनों के आधार पर भी मध्यकाल को समझने का प्रयास किया जा सकता है। जिनके द्वारा हम भारतीय मध्यकालीन इतिहास को समझ सकते हैं:-

  • चचनामा [ Chachnama ]
  • अमीर खुसरो के ग्रंथ [ Books of Amir Khusrau ]
  • जियाउद्दीन बरनी के ग्रंथ [ Books of Ziauddin Barani ]
  • शासकों के जीवन परिचय [ Biographies of the rulers ]

मध्यकालीन मठ || what is a medieval monastery In hindi :-

मध्यकालीन मठ विकसित तथा साधु-संतों के ग्रह स्थल होते थे। जहां पर भिक्षु निवास करते थे। यह मध्यकालीन मठ घरों तथा गांव से कुछ दूरी पर होते थे।

मध्यकालीन मठों के कार्य :-

मध्यकालीन मठों के कुछ प्रमुख कार्य निम्नवत हैं:-

  1. लोगों को उचित शिक्षा देना
  2. लोगों को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाना
  3. नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना।
  4. रोगियों की सेवा करना।
  5. विभिन्न प्रकार के धार्मिक गतिविधियों का आयोजन करवाना।

भारत का मध्यकालीन इतिहास प्रश्न उत्तर :-

मध्यकालीन शिक्षा क्या है?

मध्यकालीन शिक्षा को मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि मध्य काल में भारत में मुस्लिम शासकों ने राज किया तथा शिक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम शिक्षा का प्रचार प्रसार करना था।

मध्यकालीन इतिहास की जानकारी कैसे प्राप्त होती है?

मध्यकालीन इतिहास की जानकारी के लिए उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ प्रमुख निम्न है :
1) – पुस्तकें।
2) – ग्रंथ।
3) – शासकों के जीवन परिचय।

मध्यकाल से क्या तात्पर्य है? तथा मध्य काल के प्रमुख लक्षण क्या है?

मध्यकाल का तात्पर्य भारतीय इतिहास की उस कालखंड से है। जिसमें भारत पर बहुत से विदेशी शासकों ने अपना शासन किया। मध्यकाल का प्रमुख लक्षण भारत में आने वाली विदेशी शासकों से है।

मध्य इतिहास काल का समय क्या है?

मध्य इतिहास काल का समय 6वीं शताब्दी से लेकर 16 वीं शताब्दी  तक माना जाता है। जिसे दो वर्गों में विभाजित किया गया है।

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