हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय || Harivansh Rai ka jeevan parichay || now gyan

हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य की प्रमुख कवियों में से एक थे। बच्चन जी को छायावादी युग का प्रमुख कवि भी माना जाता है। हरिवंश राय जी ने मानवीय भावों का प्रयोग अति सरलता तथा सुलभता के साथ किया है।

हरिवंश राय का परिवार परिचय:

जन्म –1907, इलाहाबाद।
पूरा नाम – हरिवंश राय बच्चन।
माता का नाम – सरस्वती देवी।
पिता का नाम – प्रताप नारायण।
शिक्षा – वाराणसी व प्रयागराज।
विवाह –
मृत्यु – सन् 2003 मुंबई। 

हरिवंशराय बच्चन का जन्म सन 1907 में इलाहाबाद के एक कायस्थ परिवार में हुआ। माता-पिता दोनों ही बड़े धार्मिक थे। जिस कारण से बचपन से ही धर्म की ओर झुके हुए थे।

पत्नी व विवाह :-

बच्चन जी ने अपने जीवन काल में दो विवाह किए। जिस प्रकार से उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में भूमिका निभाई वह अत्यंत ही सराहनीय है। युवा काल में उन्होंने शिक्षा छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

   जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हुई और उनकी पत्नी असाध्य रोग का शिकार हो गई। तत्पश्चात उनकी मृत्यु हो गई।

दूसरा विवाह :-

पहली पत्नी की मृत्यु के बाद वह बहुत लंबे समय तक दुखी रहे। तब उन्होंने बाद में दूसरा विवाह करने का निर्णय लिया तथा पुनः पारिवारिक सुख के नए दौर में प्रवेश कर गए।

हरिवंश राय जी की शिक्षा:-

 हरिवंश राय बच्चन ने अपनी शिक्षा अपनी जन्मभूमि इलाहाबाद से ही प्रारंभ की। कई वर्षों तक इलाहाबाद में रहकर व वाराणसी तथा प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में रहकर शिक्षा प्राप्त की।

तत्पश्चात 10 वर्षों तक अर्थात 1942 – 1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर भी रहे। ये आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे। आकाशवाणी के माध्यम से इन्होंने अपने साहित्यिक जीवन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

  •  सन 1955 ईस्वी में विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य किया।
  • तत्पश्चात 1966 ईस्वी में इन्हें राज्यसभा में एक सदस्य के रूप में भी मनोनीत किया गया।

हरिवंश राय की साहित्यिक विशेषताएं:-

बच्चन जी ने हृदय स्पर्शी करुण रस तथा श्रृंगार रस के अंदर काव्य का सृजन किया है। अपने संपूर्ण जीवन काल में इन्होंने बहुत सी कविताएं तथा लेखों का सृजन किया है। इनके काव्य की प्रमुख विशेषताएं निम्न है:

भाषा:-

बच्चन जी ने काव्य क्षेत्र में अपनी भाषा को सरल तथा साधारण ही बनाए रखा। 

 बोली:-

अधिकतर कविताओं का सृजन इन्होंने खड़ी बोली में किया है। 

रस :-

हरिवंश राय बच्चन जी ने श्रृंगार रस तथा करूण रस को अपने साहित्यिक श्रृंगार सृजन में पिरोया है।

अलंकार :-

 बच्चन जी की कविताओं में अनुप्रास अलंकार तथा उपमा अलंकार का एक विशेष प्रयोग देखने को मिलता है।

हरिवंश राय बच्चन की प्रमुख कृतियां:-

अपने संपूर्ण जीवन में उन्होंने बहुत से काव्य तथा लेखों का सृजन किया। परंतु मधुशाला इनकी एक प्रमुख कीर्ति थी। जिसने इन्हें अत्यंत ख्याति तथा लोकप्रियता प्रदान की। इनकी प्रमुख कृतियां निम्न है:-

काव्य संग्रह :- 

  • तेरा हार।
  • मधुशाला।
  • मधुबाला।
  • मधुकलश।
  • निशा-निमंत्रण।
  • एकांत संगीत।

गीत संग्रह :-

बच्चन जी ने गीत संग्रह को भी प्रकाशित किया। जो कि हर्ष उल्लास तथा खुशी से व्यक्त गीत संग्रह है:

  • सतरंगी।
  • मिलन-यामिनी।
  • प्रणय-पत्रिका।
  • आकुल-अंतर।

आत्मकथा:-

 हरिवंश राय बच्चन जी ने अपनी आत्मकथा को लिखा था। उन्हें चार अलग-अलग खंडों में प्रकाशित किया।

  1. क्या भूलूं क्या याद करूं।
  2. नीड़ का निर्माण फिर से।
  3. बसेरे से दूर।
  4. दस द्वार से सोपान तक।

डायरी:-

हरिवंश राय बच्चन जी ने डायरी विधा के अंदर भी सृजनात्मक कला को प्रस्तुत किया। उनकी एक प्रमुख डायरी का विवरण इस प्रकार है-

  • प्रवासी की डायरी

बच्चन जी को हाला वाली दर्शन का एक प्रमुख कवि माना जाता है। इन्होंने दोनों महायुद्ध के बीच मध्य वर्ग के विक्षुब्ध, विकल, मन को बच्चन ने वाणी का रूप प्रदान किया है। उन्होंने छायावाद की लाक्षणिक वक्रता के बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा में अपनी बात को कहा है।

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